मैडीकल व डैंटल कॉलेजों में प्रवेश को लेकर  नए ‘नीट’ नियमों से संबंधित फाइल गायब

जालन्धर (धवन):केंद्र की मोदी सरकार द्वारा मैडीकल व डैंटल कॉलेजों में प्रवेश को लेकर बनाए गए नए ‘नीट’ नियमों से संबंधित फाइल ही मैडीकल कौंसिल ऑफ इंडिया (एम.सी.आई.) से गायब हो गई है जिस कारण मोदी सरकार एक नए विवाद में घिरती हुई दिखाई दे रही है। मोदी सरकार ने मैडीकल व डैंटल कॉलेजों में प्रवेश को लेकर एक मापदंड बनाया था जिसके तहत इन कॉलेजों में प्रवेश के लिए पर्सैंटेज की बजाय ग्रेङ्क्षडग को अपनाया गया था। 


दिल्ली के आर.टी.आई. एक्टीविस्ट देव आशीष भट्टाचार्य ने एम.सी.आई. के पास आर.टी.आई. लगाते हुए नए नीट नियमों से संबंधित जानकारी मांगी थी परन्तु एम.सी.आई. ने यह कह कर आर.टी.आई. का जवाब देने से इंकार कर दिया कि उनके पास फाइल ही नहीं है। 


देश में प्राइवेट मैडीकल कॉलेजों में कुल सीटों का 53 प्रतिशत हिस्सा आता है। नए नीट नियमों में प्राइवेट मैडीकल कालेजों को अपने घेरे में लिया तथा पहला नीट परीक्षा का परिणाम आने के बाद देश के विभिन्न प्राइवेट मैडीकल कालेजों में सीटें खाली रह गईं। एम.सी.आई. एक्ट के अनुसार मैडीकल प्रवेश परीक्षा में फिजिक्स, कैमिस्ट्री व बायोलॉजी में प्रवेश परीक्षा में 50 प्रतिशत न्यूनतम अंक होने अनिवार्य हैं। 


दूसरे नीट परीक्षा के बाद आर.टी.आई. एक्टीविस्ट भट्टाचार्य ने लिखा कि अनेकों विद्याॢथयों को प्राइवेट मैडीकल कॉलेजों में प्रवेश मिल गया चाहे उनके नीट में अंक 50 प्रतिशत से कम थे। भट्टाचार्य को तब शंका हुई तथा जांच करने के बाद उन्होंने पाया कि एम.सी.आई. ने मैडीकल कालेजों में प्रवेश को लेकर अपने प्रणाली को परिवर्तित करते हुए उसे प्रतिशत की बजाय ग्रेङ्क्षडग सिस्टम के अधीन ला दिया है। इसका अर्थ यह हुआ कि पहली नीट परीक्षा में योग्य विद्याॢथयों के लिए न्यूनतम मापदंड 50 प्रतिशत अंक हासिल करने से संबंधित था जबकि दूसरे नीट परीक्षा के बाद ग्रेङ्क्षडग को अपनाया गया। इसका अर्थ यह हुआ कि अगर किसी विद्यार्थी ने 20 प्रतिशत अंक भी हासिल किए हैं और वह 50 प्रतिशत ग्रेङ्क्षडग के घेरे में आते हैं तो उसे किसी भी मैडीकल कॉलेज में प्रवेश मिल सकता है परन्तु एम.सी.आई. का यह फैसला बहुत  ही विचित्र था और इस फैसले को जल्दबाजी में लिया गया। 


भट्टाचार्य ने 8 दिसम्बर 2018 को मैडीकल कौंसिल से जानकारी लेने के लिए आर.टी.आई. आवेदन लगाया। लोक सूचना अधिकारी सविता ने 19 दिसम्बर को पत्र के द्वारा जवाब भेजा जो भट्टाचार्य को 14 जनवरी 2019 को प्राप्त हुआ। इस जवाब में लोक सूचना अधिकारी ने बताया कि एम.सी.आई. द्वारा सिस्टम को पर्सैंटेज से पर्सन्टाइल में बदलने से संबंधित फाइल गायब है इसलिए सूचना उपलब्ध नहीं करवाई जा सकती है। इसका अर्थ यह हुआ कि भारत में मैडीकल एजुकेशन से संबंधित लिए गए महत्वपूर्ण फैसले को लेकर फाइल ही गायब कर दी गई। 


भट्टाचार्य ने कहा कि उन्होंने दिल्ली के पुलिस कमिश्रर के पास शिकायत देते हुए इस संबंध में केस दर्ज करने का  आग्रह किया है और साथ ही गायब हुई फाइल के बारे में विस्तृत जांच करने का भी आग्रह किया है।

Related Stories:

RELATED नियमों का उल्लंघन करने पर रिजर्व बैंक ने 7 बैंकों पर जुर्माना ठोका