इन लोगों से बर्दाश्त नहीं होती हार

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महाभारत से हमें बहुत सी ऐसी बातें जानने को मिली हैं जोकि आज के समय में भी उपयोगी मानी गई हैं। यहां तक कि गीता ज्ञान भी हमें महाभारत से ही मिला है। ऐसे ही महाभारत के शांतिपर्व में पितामाह भीष्म ने युधिष्ठिर को कई ज्ञान की बातें बताई थीं। वे बातें न की सिर्फ उस समय में बल्कि आज के समय में भी बहुत उपयोगी मानी जाती हैं। लेकिन आज हम बात करेंगे महाभारत में तीन ऐसे लोगों के बारे में, जो किसी भी परिस्थिति का सामना आसानी से कर सकते हैं। तो चलिए जानते हैं-


श्लोक 
न हि बुद्धयान्वितः प्राज्ञो नीतिशास्त्रविशारदः।
निमज्जत्यापदं प्राप्य महतीं दारुणमपि।।

अर्थात-
बद्धिमान, विद्वान और नीतिशास्त्र में निपुण व्यक्ति भारी और भयंकर विपत्ति आने पर भी उसमें फंसता नहीं है।

महाभारत में बताया गया है कि बुद्धिमान व्यक्ति के सामने चाहे कैसी भी परिस्थिति आ जाए लेकिन वे कभी घबराता नहीं बल्कि अपनी बुद्धिमता से उस स्थिति का डटकर सामना करता है। जैसे कि महाभारत में दी गई एक कथा के अनुसार यमराज ने युधिष्ठिर की बुद्धिमानी की परीक्षा लेने के लिए यक्ष का रूप लिया था और युधिष्ठिर ने भी यक्ष के सभी सवालों का सही जवाब देकर अपने भाईयों को जीवित करवाया था। 

विदुर एक विद्वान थे। जब दुर्योधन का जन्म हुआ तो उन्होंने उसे देखते ही धृतराष्ट्र को उसका त्याग कर देने की सलाह दी थी। वह जान गए थे कि यह बालक ही कौरव वंश के विनाश का कारण बनेगा। इसके अलावा विदुर ने जीवनभर अपने विद्वान होने के प्रमाण दिए हैं। वे हमेशा धृतराष्ट्र को सही सलाह देते रहे थे, लेकिन अपने पुत्र के प्यार में धृतराष्ट्र विद्वान विदुर की बातों को नहीं मानें जिसके कारण उनके कुल का नाश हो गया।

महाभारत में श्रीकृष्ण एक सफल नीतिकार के रुप में जानें गए हैं। वे हर तरह की नीतियों के बारे में जानते थे। कौरवों ने जीवनभर पांडवों को तंग किया और उनके सामने कईं परेशानियां भी खड़ी करते रहे लेकिन श्रीकृष्ण ने अपनी सफल नीतियों से पांडवों को हर वक्त सहायता की। अगर पांडवों के पास श्रीकृष्ण के जैसे नीतिकार न होते तो शायद पांडव युद्ध में कभी विजयी नहीं हो पाते। 
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