300 साल पुराना है श्रीडुल्या मारुति मंदिर, जानें क्या है इससे जुड़ा पौराणिक इतिहास

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आज हम आपको पूना के गणेशपेठ में स्थापित हनुमान मंदिर के बारे में बारे में बताने जा रहे है, जो लगभग 300 साल पुराना अति भव्य और प्राचीन है। मंदिर में स्थापित बजरंगबली की प्रतिमा को साधारण से एक काले पत्थर पर अंकित किया गया है। मंदिर में स्थापित हनुमान जी के इस रूप को डुल्या मारुति के नाम से जाना जाता है। ये मूर्ति 5 फुट उंची और ढाई फुट चौड़ी है, जो पश्चिम मुखी है। पौराणिक कथाओं के अनुसार इस मंदिर का निर्माण छत्रपति शिवाजी के गुरु श्री समर्थ रामदास द्वारा करवाया गया था। 

पौराणिक इतिहास के अनुसार समर्थ रामदास का मूल नाम नारायण सूर्याजीपंत कुलकर्णी (ठोसर) था। इनका जन्म महाराष्ट्र के औरंगाबाद जिसे के जंब नामक स्थान पर रामनवमी के दिन दोपहर में ब्राह्मण परिवार में शके 1533 सन 1608 में हुआ था। इनके पिता का नाम सूर्याजी पंत था। कगा जाता है कि इनके कुल में 21 पीढ़ी से सूर्योपासना की परंपरा चली आ रही थी। यहीं कारण था कि इनके पिता और खुद समर्थ रामदास जी सूर्य के बहुक बड़े उपासक थे। 

लोक मान्यता के अनुसार इन्होंने ने केवल महाराष्ट्र में हनुमान में मंदिर की स्थापना की बल्कि यहां रामभक्ति के साथ-साथ हनुमान भक्ति का भी प्रचार किया। इसके साथ ही यहां अखाड़े बनवाए जिसने महाराष्ट्र के सैनिकीकरण की नींव रखी, जिसने प्राचीन समय में राज्य स्थापना को बदल के रख दिया। बता दें कि मंदिर परिसर के सभा मंडप में मुख्य द्वार के ठीक सामने छत से एक पीतल का घंटा टंगा हुआ है, जिसके ऊपर शक संवत 1700 अंकित है। इस बात के अंदाज़ा लगाया जा सकता है कि ये मंदिर कितना पुराना है।


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