बिना अनुमति वाले संस्थान से  D.Ed-B.Ed-M.Ed का कोर्स करने वाले स्टूडेंट्स की डिग्री को मिली मान्यता

नई दिल्ली :देश मेॆं शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने और शिक्षकों को  बेहतर प्रशिक्षण दिलाने की आवश्यकता को स्वीकार करते राज्यसभा ने करीब 17 हजार छात्रों की बीएड की डिग्री को मान्यता देने वाले ‘राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (संशोधन) बिल 2019' को मंजूरी दे दी। इससे 20 विश्वविद्यालयों सहित विभिन्न शिक्षण संस्थानों में बीएड सहित शिक्षण प्रशिक्षण की विभिन्न डिग्रियों को मान्यता प्रदान करने से छात्रों को लाभ मिलेगा। लोकसभा इस पहले ही पारित कर चुकी है। इस विधेयक के कानून बनने से बीएड, डीएड, एमएड तथा कई अन्य पाठ्यक्रमों की पढ़ाई कर चुके उन विद्यार्थियों को राहत मिलेगी जिनके संस्थान के पाठ्यक्रमों को राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) से मान्यता प्राप्त नहीं थी।  इससे पहले जावड़ेकर ने कहा कि देश भर में लगभग दस हजार बीएड डिग्रीधारकों की डिग्री अमान्य घोषित किये जाने के संकट से बचाने के लिये कानून में संशोधन का प्रस्ताव किया गया है।

जावड़ेकर ने कहा कि सरकार बीएड को पांच साल का समन्वित पाठ्यक्रम बनाने जा रही है। उन्होंने कहा कि 2020 से देश में समन्वित बीएड पाठ्यक्रम के लिए पंजीयन कराया जाएगा। इससे पहले चर्चा में भाग लेते हुए विभिन्न दलों के सदस्यों ने शिक्षा के गिरते स्तर पर चिंता जताते हुए कहा कि सरकार को निजी शिक्षण संस्थानों पर भी लगाम कसनी चाहिए।  

ये है पूरा मामला
विधेयक पर चर्चा का जवाब देते हुए मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि इस विधेयक का मकसद एक विसंगति को दूर करना है। कुछ केंद्रीय एवं राज्य विश्वविद्यालयों ने बिना अनुमति के बीएड की शिक्षा शुरू की थी और छात्रों को उपाधि दी गई थी। मामला 2011-12 से लेकर 2016-17 तक चला। यह संस्थानों की गलती थी और इसकी सजा छात्रों को नहीं दी जा सकती। उन्होंने कहा कि पूरे मामले की जांच की जा रही है और संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय होगी।

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