लाहौर हाईकोर्ट का आदेश: शादमान चौक का नाम भगत सिंह चौक रखने की उम्मीद

होशियारपुर (अमरेन्द्र): पाकिस्तान के लाहौर स्थित शादमान चौक का नाम बदल शहीद भगत सिंह चौक रखने व चौक में शहीद भगत सिंह का बुत लगाने के मामले की बहुचर्चित मामले की सुनवाई बुधवार को लाहौर हाईकोर्ट में जस्ट्सि शाहिद जमील की अदालत में हुई।

अदालत ने मामले की सुनवाई के बाद लाहौर के लॉर्ड मेयर को आदेश दिया कि शहीद भगत सिंह मैमोरियल फाउंडेशन पाकिस्तान की तरफ से जो निगम के पास आवेदन लंबित पड़ी है उसका जल्द से जल्द निपटारा करे। लाहौर से इस बात की जानकारी देते हुए फाऊंडेशन के चेयरमैन इम्तियाज रशीद कुरैशी ने बताया कि आज लाहौर हाईकोर्ट में फाऊंडेशन की तरफ से सुप्रीम कोर्ट के वकील एडवोकेट अब्दुल रशीद कुरैशी के साथ लाहौर हाईकोर्ट के वकील एडवोकेट महबूब चौधरी व एडवोकेट शाहबाज रशीद कुरैशी पेश हुए थे।उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट के आदेश के बाद हमें पूरी उम्मीद है कि लाहौर के लॉर्ड मेयर अब जल्द ही शादमान चौक का नाम शहीद भगत सिंह के नाम पर रखने की हमारी मांग को पूरा करेगी।

शहीद भगत सिंह को मिले निशान-ए-हैदर सम्मान
फाऊंडेशन के चेयरमैन इम्तियाज रशीद कुरैशी ने कहा कि फाऊंडेशन की तरफ से पाकिस्तान सरकार से भगत सिंह को देश का सबसे बड़ा वीरता पदक निशान-ए-हैदर देने व वर्तमान शादमान चौक पर शहीद भगत सिंह का एक स्टैच्यू लगाने की डिमांड भी की है। उन्होंने कहा कि 87 साल पहले 23 मार्च 1931 को भगत सिंह को उनके दो साथियों राजगुरू और सुखदेव के साथ लाहौर में फांसी दी गई थी। भगत सिंह ने भारतीय उपमहाद्वीप को आजाद कराने के लिए अपनी जान तक दे दी, इसलिए बहादुरी के लिए उन्हें निशान-ए-हैदर दिया जाना चाहिए। फाउंडेशन ने तर्क दिया कि पाकिस्तान के फाउंडर मोहम्मद अली जिन्ना भी भगत सिंह के बहादुरी की तारीफ करते हुए उन्हें सबसे बहादुर शख्स मानते थे। भगत सिंह पाकिस्तान के साथ-साथ हिंदुस्तान के भी हीरो हैं।
 

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