भीमा कोरेगांव मामला: बॉम्बे HC का सवाल- जब मामला कोर्ट में है तो प्रेस कॉन्फ्रेंस क्यों किया?

मुंबई: भीमा कोरेगांव हिंसा मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट ने महाराष्ट्र पुलिस की प्रेस कॉन्फ्रेंस पर सवाल उठाते हुए कहा कि कि उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस क्यों आयोजित की, जबकि मामला कोर्ट में विचाराधीन है। कोर्ट ने इस पर टिप्पणी आज की है जब इस मामले की जांच एनआई से कराने के लिए दी गई याचिका पर सुनवाई कर रही थी। दरअसल, 29 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट में सामाजिक कार्यकर्ताओं और वकीलों की तरफ से गिरफ्तारी के विरोध में याचिका दाखिल की गई थी, जिसपर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने गिरफ्तार कार्यकर्ताओं की न्यायिक हिरासत पर रोक लगा दी थी और कहा था कि सभी को छह सितंबर को होने वाली अगली सुनवाई तक घरों में नजरबंद रखा जाए। 



वहीं पुणे की एक अदालत ने माओवादियों के साथ कथित संबंधों को लेकर जून में गिरफ्तार किए गए पांच व्यक्तियों के विरुद्ध आरोप पत्र दायर करने के लिए रविवार को 90 दिनों का और समय दिया है। इस मामले के जांच अधिकारी सहायक पुलिस आयुक्त शिवाजी पवार ने बताया कि अवैध गतिविधि रोकथाम अधिनियम (यूएपीए) की विशेष अदालत के न्यायाधीश के डी वधाने ने पुलिस द्वारा की गई समय बढ़ाने की मांग मान ली। उन्होंने कहा, ‘‘हम अदालत पहुंचे और हमने कहा कि जांच चल रही है। ऐसे में हमने आरोपपत्र दायर करने के लिए और 90 दिन मांगे। ’’  पुलिस इस मामले में नयी गिरफ्तारियों का हवाला देते हुए इन पांच व्यक्तियों के खिलाफ आरोप पत्र दायर करने के लिए 90 दिन का समय बढ़ाने की मांग को लेकर शनिवार को अदालत पहुंची थी। 



आपको बतां दे कि  पिछले साल 31 दिसंबर को पुणे में हुए एलगार परिषद कार्यक्रम के संदर्भ में माओवादियों के साथ कथित संबंध की जांच के संदर्भ में जून में सुधीर धावले, रोना विल्सन, सुरेंद्र गाडलिंग, शोमा सेन और महेश राउत को गिरफ्तार किया था। पुणे के समीप कोरेगांव भीमा में संपन्न इस कार्यक्रम में उत्तेजक भाषण दिए गए जिसके बाद अगले दिन हिंसा हुई।     

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