ठोस कचरा प्रबंधन नीति पर कारगर कदम उठाए जाएंगे : देवेश मोदगिल

चंडीगढ़(राय) : सुप्रीम कोर्ट द्वारा चंडीगढ़, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और उत्तराखंड आदि राज्यों में ठोस कचरा प्रबंधन नीति न होने तक निर्माण कार्यों पर प्रतिबंध लगाने के सुनाए गए फैसले से राष्ट्रीय स्वच्छता मिशन पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। सुप्रीम कोर्ट ने इस बार स्वच्छता सर्वेक्षण में प्रथम स्थान पर रहे इंदौर के राज्य मध्यप्रदेश और तीसरे स्थान पर रहे चंडीगढ़ को 3-3 लाख रुपए का जुर्माना भी लगाया है। 

मेयर देवेश मोदगिल का कहना था कि इन दिनों पार्षदों के दो दल स्वच्छता व्यवस्था के लिए ही अध्ययन दौरे पर हैं। लौटते ही ठोस कचरा प्रबंधन नीति पर कारगर कदम उठाए जाएंगे। कचरा प्रबंधन नीति न बनाने को लेकर सुप्रीम कोर्ट द्वारा जो टिप्पणी की गई है उससे डंपिंग ग्राऊंड ज्वाइंट एक्शन कमेटी को उम्मीद की किरण नजर आई है। 

कमेटी चेयरमैन दयाल कृष्ण व उनकी पूरी टीम ने सुप्रीम कोर्ट का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि वह पिछले 20 साल से डम्पिंग ग्राऊंड को  रिहायशी एरिया से शिफ्ट करने की मांग करते आए हैं मगर प्रशासनिक अधिकारियों ने जमीन न होने का हवाला देकर उनसे अन्याय किया। इन्हीं 20 सालों के बीच बस स्टैंड, जिला अदालत, एयरपोर्ट को भी शहर से बाहर किया गया और अब सब्जी मंडी को भी शहर से बाहर किया जा रहा है। 

मगर शहर से निकलने वाले कचरे के प्रबंधन को लेकर कुछ नहीं किया गया। इस बार केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय द्वारा करवाए गए स्वच्छता सर्वेक्षण के परिणाम में तो चंडीगढ़ तीसरे स्थान पर रहा था व अगली बार प्रथम स्थान पर आने के लिए चंडीगढ़ निगम करोड़ों व्यय कर रहा है व स्वच्च्छता व्यवस्था के अध्ययन के लिए पार्षद देश के अन्य राज्यों के दौरे भी कर रहे हैं। एस.सी. ने ठोस कचरा प्रबंधन नीति न बनाए जाने के चलते चंडीगढ़ सहित अन्य राज्यों में निर्माण कार्यों पर रोक लगा दी है। 

अगली सुनवाई 9 सितम्बर को :
न्यायमूर्ति मदन बी. लोकूर और एस. अब्दुल नजीर की पीठ ने स्पष्ट कहा, ‘यदि वे चाहते हैं कि लोग गंदगी व कूड़े कचरे के बीच रहें तो फिर क्या किया जा सकता है।’ पीठ ने कहा, ‘यदि इन राज्यों के मन में जनता के हित और स्वच्छता व सफाई के विचार होते तो उन्हें ठोस कचरा प्रबंधन नियमों के अनुरूप नीति तैयार करनी चाहिए, ताकि राज्य में में स्वच्छता रहे।’ अब इस मामले की सुनवाई 9 सितम्बर को होगी।

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