धीमी छपाई के कारण छात्रों को नहीं मिल पा रही हैं किताबें

नई दिल्ली :राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) की किताबों की धीमी गति से छपाई होने के चलते छात्रों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में 10वीं और 12वीं के छात्र जिनके नए सत्र का चौथा हफ्ता चल रहा है लेकिन उन्हें किताबें अभी तक नहीं मिल सकीं। जानकारी के अनुसार राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद को लगभग छह करोड़ किताबों की प्रिंटिग करनी है।

यह काम 15 मार्च तक पूरा होना था लेकिन एनसीआरटी के प्रकाशन विभाग के एक अधिकारी के मुताबिक अभी केवल 25 फीसदी किताबें ही छप कर गोदाम तक पहुंची हैं। अगर छपाई का स्टेटस देखा जाए तो अधिकारी के मुताबिक 10वीं गणित की इस माह के पहले हफ्ते तक 12 फीसद किताबें ही छप सकीं तीं। वहीं 12वीं में अकाउंटेसी की दूसरी और तीसरी किताब अभी प्रिंट नहीं की जा सकी हैं। 

आपूर्ति की कमी के चलते पुरानी किताबों का वितरण 
इस बार की किताबों में काफी बदलाव किया गया है। नई किताबों के कई चैप्टर को हटा दिया गया है और कई में बदलाव किया गया है। एनसीईआरटी ने पहली बार किताबों में क्यूआर कोड की व्यवस्था की है, ताकि छात्र पढ़ाई का ऑनलाइन मैटेरियल पा सके। सूत्रों की मानें तो एनसीईआरटी ने किताबों की धीमी छपाई के चलते पुरानी किताबों का वितरण कर दिया है। पुरानी किताबों का वितरण समस्या खड़ी करेगा, क्योंकि एक ही क्लास में छात्र अलग-अलग किताबों को पढ़ेंगे। 

स्कूलों ने सीबीएसई से कहा कि बिना किसी देरी के एनसीईआरटी की किताबों का वितरण सुनिश्चित करना चाहिए। एनसीईआरटी के अधिकारी ने बताया कि प्रकाशन के विभाग के हेड किताबों के छपाई में लगे थे, वह पुस्तक मेले में भाग लेने एक सप्ताह के लिए विदेश जा रहे हैं। मानव संसाधन विकास मंत्रालय के सूत्रों ने कहा कि किताबों की कमी को लेकर एक पत्र मिला है। इस पत्र में लिखा है कि कुल छह करोड़ किताबों में से केवल एक-चौथाई किताबों की छपाई हुई है। छपी हुईं प्रतियों को केवल दिल्ली-एनसीआर में उपलब्ध कराया गया है। 

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