नेपाल टू इराक वाया ट्रांजिट दिल्ली! देश में होती है महिलाओं की ह्यूमन ट्रैफिकिंग

नई दिल्ली(संजीव यादव): नेपाल टू इराक वाया ट्रांजिट दिल्ली! नेपाल में हाल में आई बाढ़ और तराई इलाकों में भूखमरी के चलते कुछ लोगों ने वहां की मासूम लड़कियों और जरुरतमंद महिलाओं की मजबूरी का फायदा उठा उनके जिस्म का सौदा खाड़ी देशों में करना शुरू कर दिया है। जिस्मफरोशी के इन सौदागरों ने लड़कियों को खाड़ी देशों में भेजने  के लिए दिल्ली को ट्रांजिट बनाया है और यहीं से फर्जी पासपोर्ट के जरिए महिलाओं को लगातार विदेश भेजा जा रहा है। हाल में तीन घटनाओं ने साफ किया है कि किस तरह से दिल्ली पुलिस की नाक के नीचे राजधानी में जिस्म फरोशी, फर्जी पासपोर्ट और ह्यूमन ट्रैफि किंग का धंधा चल रहा है। सवाल ये भी है कि पुलिस को अपने इलाके में लगने वाली हर रेहड़ी पटरी सहित जुए के अड्डे,सट्टे बाजार के गढ़ सब पता है,लेकिन महिलाओं के ह्यूमन ट्रैफिकिंग की जानकारी नहीं है। चूकि अब दिल्ली महिला आयोग ने एक सप्ताह में तीन बड़े  ऑपरेशन कर दिल्ली पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठाए हैं। और बताया है कि या तो दिल्ली पुलिस के अधिकारी और पुलिसकर्मी खुद ह्यूमन ट्रैफिकिंग को संरक्षण दे रहे हैं,या फिर ये जानकर भी अंजान हैं। 

क्या कहना है महिला आयोग का 
दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्षा स्वाति मालीवाल ने कहा कि हम कोई जादूगर नहीं है,इन्हीं लड़कियों और महिलाओं में से कोई मजबूर महिला हमें सूचना देती है जिस पर हम कार्रवाई करते हैं। उन्हें दिल्ली पुलिस पर विश्वास ही नहीं है। उन्होंने कहा कि हो सकता है इससे पूर्व में इन लड़कियों ने दिल्ली पुलिस से भी संपर्क किया हो,लेकिन पुलिस ने जब कार्रवाई नहीं की तो वे हमारे पास आई। बीती रात  जो ऑपरेशन किया गया, उसको भी हमने पहले गोपनीय रखा,लेकिन जब लॉ एंड ऑर्डर की बात सामने आई तो हमने पुलिस को सूचित किया। हम भी हैरान थे कि दिल्ली पुलिस जब पहुंची तो उसने पहले आनाकानी कि लेकिन बाद में जब जानकारी सोशल मीडिया पर वायरल हुई तो कार्रवाई की। ऐसे में उनकी मंशा साफ देखी जा सकती है। दिल्ली है एक बड़ा ट्रांजिट,जहां से देश और विदेश में फलता-फूलता है जिस्म फरोशी का धंधा। मानव तस्कर रोजगार व शादी का झांसा दे देशभर के गरीबों व बेरोजगारों को दिल्ली ला रहे हैं। इसके बाद उन्हें यहां चल रहीं अवैध प्लेसमेंट एजेंसी, होटल, पब, बार, डिस्को थेक, कसीनों व देह व्यापार के धंधे से जुड़े लोगों को बेच रहे हैं। वहीं, कुछ को अरब देशों में भी भेजा जा रहा है। वर्ष 2016 से 31 मार्च 2018 तक की बात करें तो दिल्ली में 208 मानव तस्करों को गिरफ्तार किया गया है।

क्या कहते हैं आंकड़े 

  • वर्ष 2016 में क्राइम ब्रांच ने 66 केस दर्ज किए थे, जिनमें 76 पुरुष व 30 महिला तस्करों को गिर तार किया गया। उनके चंगुल से 171 पुरुषों व 93 युवतियों को मुक्त कराया गया था
  • 2017 में दर्ज 95 मुकदमों में 54 पुरुष व 26 महिला तस्करों को पकड़ा गया। उनके कब्जे से 408 पुरुष व 71 युवतियों को मुक्त कराया गया था
  • 2018 में 31 मार्च तक 17 पुरुष व 5 महिला तस्करों को दबोच उनके कब्जे से 142 पुरुष व 41 युवतियों को मुक्त कराया गया।
  • कई राज्यों में फैला है जाल 
  • दिल्ली मुख्य गढ़ है जहां  पर मध्य प्रदेश, उत्तराखंड, पश्चिम बंगाल, आंध्र प्रदेश, नेपाल, पूर्वोत्तर राज्यों व राजस्थान से काफी युवतियों को दिल्ली लाकर बेचा जाता है। इसी तरह रेलवे स्टेशनों के पास कूड़ा बीनने वाली किशोरी व युवतियों को भी तस्कर अपने चंगुल में फंसाकर उन्हें देह व्यापार के धंधे में धकेल देते हैं।

     नेपाल से ये तरीका लाने का 
  • गैंग के सदस्यों ने वहां कई महिलाओं को अपना एजेंट बनाया हुआ है
  • इन्हीं के जरिए वे वहां की लड़कियों और महिलाओं को नौकरी का झांसा देकर लाते हैं
  • इन महिलाओं को गोरखपुर सनौली बॉर्डर के जरिए पहले लखनऊ और बनारस लाया जाता है वहां से दिल्ली गाडिय़ों के जरिए दलाल इन्हें लाते हैं
  • दिल्ली में अपने गैंग के जरिए ये लोग होटल या अवैध कॉलोनियों में मकान किराये पर लेते हैं जहां इन्हें रखा जाता है। 
  • जिन लड़कियों की उम्र कम होती है उनके फर्जी पासपोर्ट बनवाए जाते हैं और अधेड़ उम्र की महिलाओं को दिल्ली व अन्य राज्यों में भेजा जाता है। 
  • लखाड़ी देशों से दलाल पहले किसी कंपनी के जरिये महिलाओं के नौकरी का लेटर मंगवाते है ंऔर फिर दिल्ली समेत अन्य राज्यों से फर्जी पासपोर्ट बनवा उन्हें नौकरी वीजा पर विदेश भेजते हैं। 
  • अधिकांश लड़कियां कतर, दोहा, ओमान, दुबई और यूएई भेजी जाती है। 

    पुलिस पर ये उठे सवाल 
  • आखिर क्यों मजबूर महिलाओं को पुलिस से ज्यादा भरोसा महिला आयोग पर
  • क्या कर रही है दिल्ली क्राइम ब्रांच की ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट 
  • थाने व क्षेत्र में एक साथ एक घर में इतनी महिलाएं व लड़कियां, लेकिन पुलिस को भनक क्यों नहीं
  • मौजूदा समय हाईअलर्ट है और पुलिस हर जगह चेकिंग कर रही है, ऐसे में भी पुलिस को इसकी जानकारी क्यों नहीं 

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