नजरिया: कम से कम भक्त ही मान लें PM मोदी की बात

नेशनल डेस्क (संजीव शर्मा ): प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोगों से सोशल मीडिया पर संयम बरतने की अपील की है। वाराणसी के बीजेपी कार्यकर्ताओं को सम्बोधित करते हुए बीते कल पीएम ने सोशल मीडिया पर हो रही हेट स्पीच को लेकर चिंता जाहिर की। उनके मुताबिक व्हाट्सऐप और फेसबुक जैसे सोशल मीडिया पर आजकल लोग बात बात पर आप खो रहे हैं। अमर्यादित भाषा तो आम हो गई है। यह चिंताजनक है। अपने सम्बोधन में पीएम ने यह भी कहा कि स्वच्छता अभियान का मतलब  मानसिक स्वच्छता से भी है। उनकी बात सही भी है, देश जिस मॉब लिंचिंग के दौर से गुज़र रहा है वो इसी सोशल मीडिया की वजह से है।

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अलबत्ता पहले किसी घटना की सूचना फैलने में वक्त लगता था तब तक सही तस्वीर सामने होती थी।  लेकिन आजकल कोई भी बात सोशल मीडिया पर एकदम से वायरल हो जाती है।बिना किसी आधिकारिक पुष्टि के मामला जंगल की आग की तरह फैलता है और लोग उसे सच मानकर हिंसा पर उतारू हो जाते हैं। फिर चाहे वो पश्चिम बंगाल में एक समुदाय द्वारा दूसरे समुदाय के बच्चे को मार  डालने की घटना हो या फिर महज अफवाह के चलते मारे गए इंजीनियर की कहानी। सब जगह सोशल मीडिया ने ही बात का बतंगड़ बनाया है। हद तो यह है कि हमारे नेता और दूसरे गणमान्य भी अब इस सोशल मीडिया की फेक न्यूज़ का शिकार होकर प्रतिक्रिया दे रहे हैं। यह निश्चित ही नासमझी की पराकष्ठा है। इससे बचना होगा। यह किसी भी कोण से श्रेयस्कर नहीं है।

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इस लिहाज़ से प्रधानमंत्री की यह अपील बिल्कुल समसामयिक है। हालांकि उनकी इस अपील पर भी सोशल मीडिया में टीका-टिपण्णी शुरू हो गयी है। हमारा मानना  है कि  सबसे पहले इस अपील पर बीजेपी के समर्थकों को अमल करना चाहिए। बीजेपी इस समय दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी है। यानी किसी भी पार्टी से ज्यादा उसके समर्थक हैं। ऐसे में नेकी की शुरुआत यदि घर से हो तो कई रास्ते मानसिक स्वच्छता के निकल जाएंगे। अगर पार्टी के दस करोड़  समर्थक और  विशेष रूप से  केंद्रीय और राज्य सरकारों के मंत्री, पार्टी प्रतिनिधि /पदाधिकारी  ही हेट स्पीच से तौबा कर  लें तो समझो मामला बना गया। अभी की जो स्थितियां हैं उनके मुताबिक,गिरिराज सिंह  से लेकर संबित पात्रा तक बीजेपी में ही ऐसे नेताओं की फ़ौज भरी पडी है जो बात बात पर कुछ भी बोलकर विवाद बढ़ाती है। इसमें महिला नेत्रियां भी शामिल हैं। अगर वे सब ही हेट स्पीच से तौबा कर  लें या परहेज भी करें तो तस्वीर निश्चित तौर पर सुर्ख हो जाएगी।

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दरअसल इस मामले में सबसे बड़ी दिक्क्त क्रिया नहीं प्रतिक्रिया है। कोई भी नेता उठकर किसी भी मसले पर उल्टी -सीधी प्रतिक्रिया कर देता है और ऐसा बोल देता है जो विवाद को जन्म दे जाता है। कई मामलों में तो यह मीडिया  का ध्यान आकृष्ट करने की कोशिश के तहत जानबूझकर हो रहा है. बीजेपी के कुछ अपने मुख्यमंत्री आए दिन ऐसे ब्यान दागते रहते हैं।  इसलिए  बेहतर है कि  मोदी के भक्त  इस मामले में अपने ईष्ट की बात को आत्मसात करते हुए सोशल मीडिया पर गंदगी बिखरेने से परहेज करें, एक मुहिम  चलाएं -- no more hate on social media- नाम से।  देखें कैसे तस्वीर बदलती है। वैसे भी यह देश मॉब लिंचिंग को लेकर काफी बदनाम हो चुका  है। अब उस दाग को धोने का वक्त है।    

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