यहां दर्शन देते हैं दो मुंह वाले नाग, जाने कहां है ये अद्भुत मंदिर

ये नहीं देखा तो क्या देखा(video)
आप सभी को ये तो पता ही होगा धरती पर बहुत से जीव ऐसे हैं जिनकी पूजा की जाती है जिनमें से नाग यानि सर्प भी एक ऐसा जीव है, जिसे हिंदू धर्म में पूजनीय माना जाता है। इसका सबसे बड़ा कारण है इनका अर्थात नागों का भगवान शंकर से जुड़े होना। क्योंकि देवों के देव महादेव इन्हें अपने गले में धारण किए हुए हैं, इसलिए इन्हें हिंदू धर्म में बहुत महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त है। यही कारण है कि पुराणों में और हमारे समाज में नागों को लेकर कई कथाएं प्रचलित। तो आइए आज हम आपको एक ऐसे ही नाग के चमत्कारिक मंदिर के बारे में बताते हैं जिसके चमत्कार यकीनन आपको हैरान कर देंगे-

ये मंदिर इंदौर से करीब 30 कि.मी. दूर नागपुर नामक गांव में स्थित है। लोक मान्यता के अनुसार इस मंदिर से न केवल वहां के लोगों की बल्कि अन्य जगहों से आने वाले लोगों की भी आस्था जुड़ी हुई है। बता दें कि यहां पर नाग देवता की 3 फुट ऊंची काले रंग की पत्थर की मूर्ति है, जिसके पांच फन हैं। जैसे मंदिरों में शिवलिंग पर दूध से अभिषेक किया जाता है ठीक वैसे ही इस मंदिर में नाग की इस मूर्ति का दूध से अभिषेक किया जाता है। बता दें कि नागपंचमी के दिन यहां मेला लगता है, जिसमें लोग दूर-दूर से शामिल होते हैं और अपनी इच्छाओं की पूरा होने की कामना करते हैं। बता दें कि इस नाग मंदिर से कई तरह की और मान्यताएं और कहानियां भी जुड़ी हुई हैं। तो चलिए जानते हैं इन मान्यताओं के बारे में- 

नाग को भगवान शिव का श्रृंगार माना जाता है। पुराणों में नाग को लेकर अलग-अलग स्थानों पर कई किंवदंतियां और कहानियां जुड़ी हुई हैं। इन कहानियों और किंवदंतियों ने नागों के प्रति लोगों की आस्था को बढ़ाया है। जिनका नमूना नागों को समर्पित ये अद्भुत मंदिर है। बता दें कि इस मंदिर का निर्माण कई वर्षों पहले हुआ था। पौराणिक कथाओं क के अनुसार कई साल पहले एक महिला के गर्भ से एक बच्चे और एक नाग ने जन्म लिया था। महिला इसे लेकर डर गई कि कहीं नाग बच्चे को डस न लें, उसने नाग को कहीं दूर तालाब में छोड़ दिया। तब वो नाग पत्थर में तबदील हो गया। कुछ दिनों बाद महिला को सपने में वही नाग आया जिसमें उसने उस प्रतिमा के बारें में जिक्र किया। ये बात उसने अपने पति को बताई, धीरे-धीरे ये बात पूरे गांव में फैल गई। लोगों की भीड़ तालाब के पास जमा हो गई। लोगों ने जब देखा तो सच में एक पत्थर की प्रतिमा जो देखने में नाग जैसी लगती थी वह तालाब में पड़ा थी। लोगों को ये बात किसी चमत्कार से कम न लगी। जिसके बाद उन्होंने उस मूर्ति को बाहर निकालकर वहां मंदिर का निर्माण करवाया। तब से इस गांव का नाम नागपूर पड़ गया। 

मंदिर को लेकर एक और मान्यता भी प्रसिद्ध है जिसके अनुसार यहां महिला के गर्भ से नाग-नागिन ने जन्म लिया था। लोगों ने नागिन को मार दिया तब नाग ने पत्थर का रूप धारण कर लिया। तभी से यहां मंदिर का निर्माण हुआ है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि यहां की सबसे खास बात यह है कि परिसर में कई बार दो मुंह के सर्प भी दिखाई देते हैं। महिलाएं इस मंदिर में अपनी मनौती पूर्ण होने के लिए उल्टे स्वास्तिक बनाती हैं और जब उनकी कामना पूरी हो जाती है तब मंदिर में सीधा स्वास्तिक बनाती हैं।
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