मोदी ने फिर पाकिस्तान को घेरा, अमेरिका से कहा- आतंकी हमलों का एक ही केंद्र

इंटरनेशनल डेस्कः प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक बार फिर आतंकवाद के मुद्दे पर पाकिस्तान को बिना नाम लिए घेरा है। उन्होंने पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन के दौरान अमेरिकी उपराष्ट्रपति से मुलाकात के दौरान कहा कि दुनिया में कहीं भी आतंकी हमले होते हैं, उसकी जन्मस्थली आखिर में एक ही पता चलती है। माइक पेंस से मुलाकात के दौरान कहा कि दुनिया में हुए आतंकी हमलों के सुराग और लीड्स एक ही सॉर्स और प्लेस पर जाकर खत्म होती है। आपकी बता दें कि पीएम मोदी इससे पहले भी कई बार विभिन्न अंतरर्राष्ट्रीय मंचों से पाकिस्तान को आतंकवाद की जन्मस्थली बता चुके हैं।



पूर्वी एशिया सम्मेलन से इतर मोदी ने पेंस के साथ पारस्परिक हिते के कई द्विपक्षीय और वैश्विक मसलों पर चर्चा की। उन्होंने पाकिस्तान में आंतकियों के भी चुनाव हिस्सा लेने पर गंभीर चिंता जताई। बैठक के बाद विदेश सचिव विजय गोखले ने पत्रकारों को बताया कि आतंकवाद के मसले पर दोनों नेताओं ने चर्चा की। उन्होंने बताया कि पेंस ने आगामी 26 नवंबर को मुंबई महलों की 10वीं बरसी का जिक्र किया और आतंकवाद के खिलाफ दोनों पक्षों के सहयोग की प्रशंसा की।



बता दें कि पाकिस्तान स्थित लश्कर-ए-ताइबा के 10 आतंकियों ने मुंबई हमले को अंजाम दिया, जिसमें 166 लोगों की जान चली गई थी। पुलिस की जवाबी कार्रवाई में 9 हमलावर मार गिराए गए और एक आतंकी अजमल कसाब को जिंदा पकड़ लिया गया था। कोर्ट द्वारा मौत की सजा सुनाने के बाद कसाब को फांसी दे दी गई थी।



पीएम मोदी ने किसी संस्थान या देश का नाम लिए बगैर अमेरिकी उपराष्ट्रपति को याद दिलाया कि किसी भी तरह से देखें, तो वैश्विक आतंकवादी हमलों में सामने आई जानकारी मालूम होता है, कि इन सभी का सॉर्स और जन्मस्थली अंततः एक ही है। दरअसल, दुनियाभर में हुए कई आतंकी हमले पाकिस्तानी मूल के लोगों ने ही किए हैं। अमेरिका के कैलिफॉर्निया में 2 दिसंबर 2015 को अंधाधुंध गोलीबारी कर पाकिस्तानी मूल के एक कपल ने 14 लोगों को मौत के घाट उतार दिया था।


प्रधानमंत्री मोदी ने इस बात पर भी चिंता व्यक्त की, कि मुंबई हमले के मास्टरमाइंड हाफिज सईद की पार्टी चुनाव में उतरी। गोखले ने बताया कि मोदी ने साफ कहा कि मुंबई हमलों में शामिल लोग पाकिस्तान में हाल के चुनाव में भी शामिल हुए। यह केवल दो देशों – भारत और अमेरिका ही नहीं, बल्कि पूरे अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए चिंता का विषय होना चाहिए।

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