कहीं जाखड़ को उलटा न पड़ जाए जीरा को शो-कॉज नोटिस का दाव

जालंधर(रविंदर):सरकारी प्रोग्राम में नशे का मुद्दा उठाने व पुलिस अधिकारियों की तस्करों के साथ मिलीभगत की आवाज बुलंद करने वाले विधायक कुलबीर सिंह जीरा एक तरफ अपनी ही सरकार के निशाने पर आ गए हैं तो वहीं दूसरी तरफ पार्टी वर्कर जीरा के इस हौसले की दाद दे रहे हैं।


पार्टी प्रधान सुनील जाखड़ ने कुलबीर सिंह जीरा को इस पूरे एपीसोड के लिए शो-कॉज नोटिस जारी किया है, मगर ऐसा करते ही सुनील जाखड़ अपने ही पार्टी वर्करों के निशाने पर आ गए हैं। वर्करों के तेवर से लगने लगा है कि कहीं जाखड़ का कैप्टन प्रेम कहीं उन्हें ही भारी न पड़ जाए।  पंचों व सरपंचों के शपथ ग्रहण समारोह में विधायक जीरा ने खुले तौर पर कहा था कि आज भी पंजाब में नशे का कारोबार जस का तस हो रहा है। इसके लिए जीरा ने पुलिस अधिकारियों की मिलीभगत को दोषी ठहराया था और खास तौर पर आई.जी. मुखविंद्र छीना की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाया था। जीरा का साफ कहना था कि जिस नशे के मुद्दे को खत्म करने की शर्त पर कांग्रेस सत्ता में आई थी, अगर वह इश्यू ही खत्म न कर पाई तो जनता को क्या जवाब दिया जाएगा।

यह मुद्दा उठाकर जीरा ने शपथ ग्रहण समारोह का बॉयकाट कर दिया था। जीरा के इस व्यवहार से विपक्ष को एक मुद्दा जरूर मिल गया था, मगर पार्टी वर्करों के सैंटीमेंट व भावनाओं को जीरा जरूर जगा गए। पार्टी नेताओं व वर्करों का कहना है कि पार्टी को शो-कॉज नोटिस से बचना चाहिए था क्योंकि वर्करों की भावनाओं को ही जीरा ने स्टेज से उठाया है। उन्होंने पार्टी या सरकार के खिलाफ स्टेज से कुछ नहीं बोला बल्कि पुलिस व ब्यूरोक्रेट्स की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं। ऐसे में पार्टी व सरकार को जीरा की बात को गंभीरता से लेना चाहिए था न कि शो-कॉज नोटिस निकालना चाहिए था। 


 

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