#MeToo की चपेट में ऑल इंडिया रेडियो, मेनका गांधी ने की जांच की मांग

नेशनल डेस्क: देश में इन दिनों #MeToo अभियान की लहर है। इसके ज़रिये सैकड़ों महिलाएं ख़ुद के साथ हुए यौन दुर्व्यवहारों की घटनाएं सोशल मीडिया पर ज़ाहिर कर चुकी हैं। इनमें कई दुर्घटनाएं उनके साथ कार्यस्थल पर हुई हैं। पिछले कुछ समय से ऑल इंडिया रेडियो में यौन शोषण के कई मामले सामने आए हैं, जिन्हें लेकर महिला एवं बाल विकास मंत्री मेनका गांधी ने सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय से जांच की मांग की है।



महिला कर्मचारियों ने बताई आपबीती 
खबरों के अनुसार, ऑल इंडिया रेडियो के कई स्टेशनों से यौन शोषण के मामले सामने आए हैं। ये मामले अधिकतर कॉन्ट्रैक्ट पर काम करने वाली महिला कर्मचारियों के साथ ही हुए हैं। इनमें से कुछ महिलाएं यहां दो दशकों से काम कर रही थीं, लेकिन शिकायत करने के बाद से अब उन्हें काम नहीं दिया जा रहा है। हाल ही में ऑल इंडिया रेडियो कैजुअल अनाउंसर एंड कम्पेयेर्स यूनियन (AICACU) ने मेनका गांधी को चिट्ठी लिखी थी, जिसके बाद उन्होंने केंद्रीय राज्यमंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौड़ को मामले में जांच करने को कहा है। 


आरोपियों पर नहीं हुई कार्रवाई
शिकायतों के अनुसार, सभी आरोपी ऑल इंडिया के परमानेंट कर्मचारी हैं। आरोप लगने के बाद कुछ को आरोप मुक्त कर दिया गया तो कुछ का ट्रांसफर कर दिया गया है। इसके अलावा, उन पर कोई कार्रवाई नहीं की गई है। AICACU ने मेनका को लिखे खत में बताया था कि कैजुअल अनाउंसर या रेडियो जॉकी खुद पर हो रहे शोषण के खिलाफ आवाज नहीं उठा पाते, क्योंकि हमेशा उन्हें नौकरी जाने का डर बना रहता है।


महिलाओं को नौकरी जाने का डर 
खत में कहा गया कि जिस भी कर्मचारी ने यौन शोषण जैसी शिकायत की, उसे नौकरी से निकाल दिया जाता है और उसका साथ देने वालों को भी ऐसी ही स्थितियों का सामना करना पड़ता है। पीड़ित महिलाओं ने अपनी आपबीती बताते हुए कहा कि उनके स्टेशन हेड उनको गलत तरीके से छूते तक हैं। जबसे उन्होंने शिकायत की है तब से उन्हें कोई असाइनमेंट (काम) नहीं मिल रहा है।

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