उपभोक्ता फोरम का आदेश-सेवा में देरी के कारण उपभोक्ता को 33 लाख की राशि अदा करें कार डीलर

जालंधरः पंजाब उपभोक्ता शिकायत निवारण ने परागपुर स्थित अधिकृत जोशी ऑटो जोन प्राइवेट लिमिटेड को सेवा में देरी के कारण 33,35,530 की राशि के साथ उपभोक्ता को कानूनी खर्च के रूप में 22 हजार रुपए की राशि के भुगतान का आदेश दिया है।  जालंधर के फोक्ल प्वाइंट स्थित बबल एक्सपोर्ट ने अपने साथी तरनबीर सिंह की तरफ से परागपुर स्थित जोशी ऑटो जोन प्राइवेट लिमिटेड के खिलाफ उपभोक्ता फोरम में शिकायत दर्ज करवाई थी।

उन्होंने बताया कि था कि कार डीलर से उन्होंने  मर्सिडीज कार 38,38,840 रुपए में अगस्त 2015 में खरीदी थी। इस दौरान कार का डी.टी.ओ. कार्यलय जालंधर में स्थायी पंजीकरण करवाने के लिए उन्होंने विरोधी पक्ष को 2.95 लाख की अग्रिम राशि चैक के रूप में दी थी। डीलर ने उन्हें आश्वस्त किया था कि उनकी कार का एक माह के भीतर पंजीकरण हो जाएगा। इस दौरान कार डीलर ने उनको 27 सितंबर, 2015 तक अस्थायी पंजीकरण संख्या जारी कर दी। उपभोक्ता ने कार का एक साल का बीमा कवर भी 1,10,595 रुपए चुकाकर खरीदा। 

शिकायतकर्ता ने  कहा कि पैसे लेने के बाद डी.टी.ओ. कार्यालय में वाहनको 30 दिनों में पंजीकरण करवाने के लिए दस्तावेज जमा करवाने की जिम्मेदारी कार डीलर की थी। पर पैसे लेने के बाद उसने दस्तावेज जमा करवाने में लापरवाही बरती। इस कारण उन्हें खासी परेशानी का सामना करना पड़ा। तरनबीर के पिता सरबजीत  सिंह ने बताया कि 7 अक्तूबर 2015 को  जब उनका बेटा कार में लुधियाना से जालंधर लौट रहा था तो फिल्लौर के पास सड़क हादसे में उनकी कार क्षतिग्रस्त हो गई।

उन्होंने कार क्षतिपूर्ति का क्लेम लेने के लिए बीमा कंपनी में दावा किया। यहां उनके दावे को इस आधार पर खारिज कर दिया था कि दुर्घटना  के समय उनकी कार वैध तौर पर पंजीकृत नहीं थी।  कार डीलर को 8 अगस्त 2015 को पंजीकरण शुल्क और सड़क कर जमा  करवाने के बावजूद उन्हें कार की लागत के बराबर नुकसान उठाना पड़ा।वहीं दूसरी तरफ विरोधी पक्ष ने उपभोक्ता फोरम में अपना पक्ष रखते कहा कि शिकायतकर्ता अपनी पसंद का पंजीकरण नंबर लेना चाहता था।

इसलिए,पंजीकरण की प्रक्रिया में देरी हुई।  उपभोक्ता को मोटर वाहन अधिनियम की धारा 39 के मद्देनजर अस्थायी पंजीकरण संख्या की समाप्ति के बाद वाहन को सड़क पर नहीं ले जाना चाहिए था। उपभोक्ता फोरम ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद फैसला सुनाते कहा कि वाहन के स्थायी पंजीकरण के लिए उपभोक्ता द्वारा 2.95 लाख की राशि का भुगतान कार डीलर को किया गया था। वह समय पर वाहन को पंजीकृत कराने में विफल रहा। इसलिए सेवा में देरी और इसके परिणामस्वरूप हुए नुकसान के कारण कार डीलर दुर्घटना की तारीख से 7 अक्तूबर, 2015 तक 9 प्रतिशत प्रति वर्ष की दर से ब्याज के साथ राशि का भुगतान उपभोक्ता को करें।  

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