मासिक दुर्गा अष्टमी: जानें व्रत और पूजन विधि

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मासिक दुर्गा अष्टमी हर महीने की शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाई जाती है। ये दिन मां भगवती को समर्पित होता है और कुछ लोग आज के दिन मां दुर्गा का व्रत भी रखते हैं। मान्यता है कि अगर इस दिन पूरे मन से व्रत पूजन किया जाए तो माता उसकी सभी मनोकामनाएं पूरी करती है। दुर्गाष्‍टमी को मां दुर्गा के काली, भवानी, जगदम्बा, नवदुर्गा आदि स्‍वरूपों की पूजा की जाती है। प्रत्येक मास को पड़नी वाली दुर्गा अष्टमी का एक अलग ही महत्व होता है। तो चलिए आज हम आपको इससे जुड़ी एक पौराणिक कथा और पूजन विधि के बारे में बताएंगे। 


एक पौराणिक कथा के अनुसार महिषासुर सब असुरों में सबसे शक्तिशाली असुर था। उस समय देवता गण महिषासुर से बहुत डरे हुए थे। वे सब मिलकर त्रिदेवों का पास पहुंचे। त्रिदेवों ने मिलकर नवदुर्गा को बनाया और हर देव ने देवी दुर्गा को विशेष हथियार प्रदान किया। इसके पश्चात आदिशक्ति दुर्गा पृथ्वी पर आई और असुरों का वध किया। मां दुर्गा ने महिषासुर की सेना के साथ युद्ध किया और अंत में उसे मार दिया। उस दिन से दुर्गा अष्टमी का पर्व प्रारम्भ हुआ।

पूजन विधि-
सबसे पहले स्नान करके साफ-सूथरे कपड़े पहनने चाहिए और मां दुर्गा के व्रत का संकल्प करना चाहिए। 

लकड़ी के पाट पर लाल वस्त्र बिछाकर उस पर मां दुर्गा की प्रतिमा या चित्र स्थापित कर लें। फिर माता को अक्षत, सिन्दूर और लाल पुष्प अर्पित करें, फिर प्रसाद के रूप में फल और मिठाई चढ़ाएं।

धूप, दीप जलाकर पूरे मन से मां का गुणगान करें, दुर्गा अष्टमी का पाठ करें और बाद में मां की आरती उतारें।

आरती के बाद आपको नौ छोटी कन्याओं को बुलाकर उनके पैरों को पानी से धोना चाहिए और उनके लिए पूरी और हलवा प्रसाद के रूप में भोजन कराना चाहिए।

अंत में मां के सामने सच्चे मन से प्रार्थना करें ताकि वे आपकी हर इच्छा को पूर्ण कर सकें। 
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