ohh! तो ये है सुखी जीवन जीने का रास्ता...

ये नहीं देखा तो क्या देखा (VIDEO)
प्राचीन समय में मिडास नाम का एक राजा हुआ करता था, जिसकी स्वर्ण के प्रति बड़ी आसक्ति थी। एक रात उसे सपने में ईश्वर ने दर्शन दिए और उससे मनचाहा वर मांगने को कहा। मिडास ने तनिक देर किए बिना अपने आराध्य से वरदान मांग लिया कि वह जिसे स्पर्श करे वह सोना बन जाए।


राजा ने अपने प्राय: हर चीज़ स्पर्श की और वे सभी स्वर्ण में परिणत हो गईं। राजा की बेटी,जिसे वह प्राणों से भी अधिक प्यार करते थे, दौड़ती हुई आई और अपने पिता से लिपट गई। बेटी तत्क्षण सोने की गुड़िया बन कर रह गई। अपनी लाडली को सोने में बदला देखकर मिडास को ‘स्वर्ण स्पर्श’का वरदान मांगने पर काफ़ी अफसोस हुआ।

कहते हैं कि अगली रात सपने में ईश्वर ने फिर राजा को दर्शन दिए और पुन: एक वर मांगने के लिए कहा। मिडास ने इस बार बिना देरी किए ‘स्वर्ण स्पर्श’ वापस लेने की प्रार्थना की। राजा ने सबसे पहले अपनी बेटी को स्पर्श किया और उनकी बेटी खिलखिला कर हंस पड़ी। खुशी के मारे मिडास की आंखें भर आईं। मिडास को पहली बार अपने जीवन में सच्चे सुख और वास्तविक खुशी के रहस्य का इतने सरल और सहज रूप में अहसास हुआ।


सच पूछिए तो इस धरती पर जन्म के साथ ही सुख की चाह में जिस अंतहीन यात्रा का आगाज़ होता है, वह व्यक्ति की अंतिम सांस तक चलता रहता है। सुख की प्राप्ति का रास्ता वास्तव में कभी भौतिक सुविधाओं एवं संसाधनों की उपलब्धता में नहीं पाया जाता। सुख का दर्शन सच मायने में व्यक्ति की मनोदशा पर निर्भर करता है।

मानसिक विकारों एवं सांसारिक संतापों से मुक्त जीवन को शास्त्रों में सुखमय जीवन कहा गया है। मिथ्या,सांसारिक चमक-दमक भरे जीवन में सुख की खोज रेगिस्तान में पानी की तलाश सरीखा होती है।

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