मनप्रीत बादल का दावा, 3 वर्षों के बाद पूरी तरह से पटरी पर आएगी वित्तीय हालत

चंडीगढ़(भुल्लर): शिअद-भाजपा सरकार जाते-जाते 7800 करोड़ रुपए के बिलों की देनदारियां छोड़ गई थी लेकिन बढिय़ा वित्तीय मैनेजमैंट और खर्चों में कटौती के साथ खजाने की स्थिति में सुधार करने में मौजूदा सरकार ने सफलता प्राप्त की है। यह दावा पंजाब के वित्त मंत्री मनप्रीत बादल ने विधानसभा में 2019-20 के नए बजट प्रस्तावों को पेश करने के बाद प्रैस कॉन्फ्रैंस में किया।


उन्होंने कहा कि तीसरे वर्ष के बाद माली हालत में संतुलन बनने के साथ पूरी तरह पटरी पर आ जाएगी। राज्य की वित्तीय हालत में सुधार का ही नतीजा है कि सभी विभागों को पहले से अधिक फंड अलॉट किए गए हैं। सरकार ने पहले वर्ष ही चुनावी वायदों को पूरा करने के लिए कार्य शुरू कर दिया था और 5 वर्ष दौरान कई वायदे पूरे कर देंगे। 15वें वित्त आयोग ने भी पंजाब के दौरे के समय 31 हजार करोड़ रुपए की अनाज की राशि के हिसाब को सही कर राज्य के सिर चढ़े कर्जे के हल का भरोसा दिया है और केंद्र से सकारात्मक जवाब मिला है।

जी.एस.टी. में 14 फीसदी वृद्धि का लाभ मिलेगा
मनप्रीत ने कहा कि सुझाव अनुसार कर्जे की राशि में से एक-तिहाई अर्थात 10 हजार करोड़ की केंद्र सरकार भरपाई कर दे तो इतनी ही सहायता बैंक करने या राज्य सरकार बाकि तीसरा हिस्सा स्वयं भर देगी। यह मामला हल होने से राज्य को 20 हजार करोड़ रुपए से अधिक का लाभ मिलेगा। कर्जा माफी, घर-घर रोजगार और अन्य ऐसे वायदों को पूरा करने के लिए साधन जुटाने संबंधी उन्होंने कहा कि जी.एस.टी. में 14 फीसदी की वृद्धि राज्य को मिलेगी और 3 वर्ष केंद्र सरकार ने ही राज्य की भरपाई करनी है जिसके साथ कार्यों को पूरा करने में मुश्किल नहीं आएगी। माल वसूली में वृद्धि हो रही है और टैक्स वसूली बढऩे के साथ आने वाले समय में फायदा होगा। युवाओं को स्मार्ट फोन देने संबंधी वायदे बारे उन्होंने कहा कि टैंडर लग चुके हैं। पैट्रोल और डीजल पर वैट कम करने संबंधी कहा कि राज्य के व्यापार और उद्योग को मजबूत करने के लिए बहुत जरूरी था। वैट कम करने से जो घाटा होगा उसकी भरपाई पैट्रोलियम पदार्थों की बिक्री बढऩे से होगी। सीमांतर क्षेत्रों के पैट्रोल पम्प तो अधिक वैट के कारण बंद होने की कगार पर जा पहुंचे थे।

कर्मचारियों की बाकी अदायगियां भी जल्द करेंगे
उन्होंने कहा कि नई आबकारी पॉलिसी भी ऐसी होगी जिससे राज्य की आय पहले से काफी बढ़ेगी और माइनिंग की आय में पहले से वृद्धि होगी। कर्मचारियों की मांगों बारे बजट में जिक्र न होने बारे उन्होंने कहा कि 6 फीसदी डी.ए. देकर शुरूआत की और आने वाले समय में जैसे-जैसे स्थिति में सुधार होगा तो कर्मचारियों की बाकी अदायगियां भी जल्द कर दी जाएंगी। किसानों की बिजली सबसिडी जारी रखे जाने को सही ठहराते हुए कहा कि किसानों को संकट से निकालने के लिए यह जरूरी है। इस सबसिडी के साथ 9 हजार करोड़ रुपए की अदायगी के साथ बजट पर बड़ा प्रभाव पड़ता है। राज्य के सिर चढ़े कर्जे को भी कम करने के पूरे प्रयास किए जाएंगे। अकालियों की तरह मंडी बोर्ड और ग्माडा जैसी प्रॉपर्टियां बेचकर आय नहीं बढ़ाएंगे बल्कि किसी और तरह से स्रोत बढ़ाएंगे।

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