साइबर युद्ध के मूड में ममता बनर्जी

निवेश परियोजनाओं और कार्यक्रम के बाद पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी अब पूरी तरह से जंग के मूड में हैं। वह अब साइबर युद्ध में व्यस्त हैं तथा उन्होंने अपने भतीजे सांसद अभिषेक बनर्जी को आई.टी. सैल का प्रमुख बना दिया है तथा राज्यसभा सदस्य डैरेक ओ’ब्रायन सोशल मीडिया के मामले में अभिषेक की सहायता कर रहे हैं। 

10 सितम्बर को कोलकाता में डिजीटल कांफ्रैंस का आयोजन किया जा रहा है, जहां सोशल मीडिया संबंधी नीति और कार्यक्रम तय किए जाएंगे। ममता बनर्जी ने युवाओं से आह्वान किया है कि वे सरकार की उपलब्धियों को बताने के लिए सोशल मीडिया का प्रयोग करें। इस समय ममता बनर्जी का उद्देश्य आगामी लोकसभा चुनाव में सभी 42 लोकसभा सीटों को जीतना है। पिछले लोकसभा चुनाव में उन्होंने 34 सीटें जीती थीं तथा भाजपा ने 2 सीटें जीती थीं। 

भाजपा भी पश्चिम बंगाल में अपना जनाधार बढ़ाने के लिए सोशल मीडिया का प्रयोग कर रही है। भाजपा भी यहां अपना आई.टी. सैल का कार्यालय खोलने का प्रयास कर रही है, जो सभी सुविधाओं से लैस होगा। भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने कार्यकत्र्ताओं को पश्चिम बंगाल में 22 सीटें जीतने का लक्ष्य दिया है तथा उन्हें निर्देश दिया है कि वह सोशल मीडिया पर सक्रियता बढ़ाएं और मोदी सरकार की उपलब्धियों को जनता तक पहुंचाएं। 

कांग्रेस अल्पसंख्यक सैल का पुनर्गठन
कांग्रेस अल्पसंख्यक सैल के प्रमुख नदीम जावेद अब अल्पसंख्यक सैल का पुनर्गठन कररहे हैं तथा अल्पसंख्यकों में गहरी पैठ बनाने का प्रयास कर रहे हैं। इसके लिए नदीम सभी बड़े राज्यों में तीन समन्वयकों तथा छोटे राज्यों में एक समन्वयक की नियुक्ति कर रहे हैं। वह युवाओं को संगठन में शामिल कर रहे हैं तथा 40-45 की आयु के लोगों को समन्वयक बनाने का प्रयास कर रहे हैं। इसके अलावा वह अल्पसंख्यक सैल में यूथ कांग्रेस, एन.एस.यू.आई. के पूर्व नेताओं तथा शिक्षित महिलाओं को सक्रिय करने की कोशिश कर रहे हैं।

नौकरशाहों के बदले तेवर
राजस्थान में मुख्य चुनाव अधिकारी अश्विनी भगत के खिलाफ कांग्रेस तथा उनके कनिष्ठ अधिकारियों की ओर से चुनाव आयोग से की गई बहुत-सी शिकायतों के बाद उन्हें हटा कर आनंद कुमार को मुख्य चुनाव अधिकारी बना दिया गया है। वसुंधरा राजे सरकार के प्रति अधिकारियों के व्यवहार में परिवर्तन देखा जा रहा है। राजस्थान के जिला कलैक्टरों पर इसका ज्यादा प्रभाव है, जो चुनाव की घोषणा होने के बाद प्रशासनिक तौर पर मुख्य चुनाव अधिकारी आनंद कुमार के अधीन आ जाएंगे। 

राजस्थान में सामान्य बात है कि आई.ए.एस. और आई.पी.एस. अधिकारी सेवानिवृत्ति के बाद राजनीति में आ जाते हैं और इस समय 4 पूर्व अधिकारी राजस्थान से सांसद हैं। अर्जुन राम मेघवाल और छोटू राम चौधरी इस समय मोदी सरकार में मंत्री हैं परन्तु वर्तमान परिदृश्य में बहुत से सेवानिवृत्त अधिकारी तथा निकट भविष्य में सेवानिवृत्त होने वाले अधिकारी कांग्रेस की टिकट के लिए लाइन में हैं। राजस्थान के राजनीतिक सूत्रों के अनुसार अधिकारियों के बदले हुए तेवर राजस्थान में आगामी चुनावों के ट्रैंड को दर्शाते हैं। 

प्रणव मुखर्जी पढ़ाएंगे सार्वजनिक नीति का पाठ
उनके एक पूर्ववर्ती, ए.पी.जे. अब्दुल कलाम ने राष्ट्रपति पद छोडऩे के बाद लैक्चर टूर के तौर पर करियर बनाया था। अब प्रणव मुखर्जी भी ऐसा करने जा रहे हैं। पूर्व राष्ट्रपति ने आई.आई.एम.-ए में इस महीने से 3 महीने की टीचिंग असाइनमैंट ली है। यहां वह मैनेजमैंट विद्यार्थियों के साथ भारत के सम्मिलित विकास में सार्वजनिक नीति के योगदान पर अपने विचार सांझा करेंगे। वह इस दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। 

राहुल की कैलाश यात्रा
उन लोगों को अपने दृष्टिकोण पर पुनर्विचार करना पड़ सकता है, जिनका यह विचार था कि चुनावी सीजन के बीच में राहुल गांधी ने कैलाश मानसरोवर यात्रा पर जाकर बड़ी गलती की है। यह गांधी परिवार की ओर से आम जनता के लिए एक बहुत सोचा-समझा संदेश है, जिसे इस परिवार के धार्मिक और आध्यात्मिक रूझान के प्रति संदेह रहा है। इस यात्रा के फोटो भी इस तरह से जारी किए जा रहे हैं, जो लोगों का ध्यान अपनी ओर आकॢषत कर रहे हैं। इस प्रकार राहुल के अपने और ग्रुप फोटो आखिर में जारी किए गए। प्रकृति और कैलाश को प्रमुखता दी गई। राहुल 12 सितम्बर को अपनी कैलाश यात्रा से वापस आएंगे।-राहिल नोरा चोपड़ा

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