ऑफ द रिकॉर्डः ममता गठबंधन के लिए कांग्रेस को लुभा रही हैं

नेशनल डेस्कः अब यह बात स्पष्ट होकर उभर रही है कि कांग्रेस आगामी लोकसभा में बसपा और तृणमूल कांग्रेस के साथ गठबंधन करेगी। माकपा के महासचिव सीताराम येचुरी पश्चिम बंगाल में कांग्रेस के साथ गठबंधन करने के इच्छुक हैं मगर यह बात सिरे नहीं चढ़ रही। इसका एक कारण यह है कि कांग्रेस और वामदल केरल में कट्टर प्रतिद्वंद्वी हैं। कांग्रेस के रणनीतिकारों ने भी राहुल गांधी को सलाह दी है कि किसी भी स्थिति में वामदल बाहर से समान विचार वाली पार्टियों के गठबंधन को समर्थन देंगे इसलिए वामदलों को पश्चिम बंगाल, केरल और त्रिपुरा में अकेले ही रहने दिया जाए। दूसरे राज्यों में भी वामदल 3 या 4 सीटों पर दावा जता सकते हैं। बाद में उन पर विचार किया जा सकता है मगर कांग्रेस को 2019 के लोकसभा चुनावों के दौरान ममता बनर्जी के साथ जाना चाहिए।
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कांग्रेस का पश्चिम बंगाल की 42 संसदीय सीटों में से 7-8 सीटों पर दावा उचित है मगर तृणमूल कांग्रेस 5-6 सीटों पर राजी होगी। उनकी दलील यह है कि इस गठबंधन का दाव बहुत ऊंचा होगा। तृणमूल कांग्रेस और कांग्रेस का गठबंधन 39 लोकसभा सीटों पर जीतने में सक्षम है क्योंकि वामदलों में अधिकांश कैडर या तो भाजपा या तृणमूल कांग्रेस के हैं। तृणमूल कांग्रेस ने 2014 के लोकसभा चुनावों के दौरान 34 जबकि कांग्रेस ने 2 सीटें जीती थीं। दोनों दलों ने अलग-अलग चुनाव लड़ा था।
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भाजपा ममता सरकार विरोधी लहर, हिंदू भावनाओं और मोदी लहर के आधार पर पश्चिम बंगाल में 21 सीटों पर जीत का लक्ष्य बनाए हुए है। ममता कांग्रेस के साथ हाथ मिलाने की इच्छुक हैं ताकि इस सरकार विरोधी लहर पर काबू पाया जा सके और सर्वसम्मति से प्रधानमंत्री पद की उम्मीदवार के रूप में उभर सकें।

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