चीन को बड़े झटका देने की तैयारी में मालदीव

मालेः  मालदीव में राष्ट्रपति चुनाव में संयुक्त विपक्षी उम्मीदवार इब्राहिम मोहम्मद सोलिह की जीत के साथ ही देश की सियासत ने नई करवट ली है। राष्ट्रपति अब्दुल्ला यामीन द्वारा लोकतंत्र पर अंकुश लगाने की कोशिशों के बावजूद उन्हें चुनावों में बड़ी हार का सामना करना पड़ा। चीन समर्थक यामीन की हार भारत के लिए अच्छा संकेत है। चुनाव नतीजे घोषित होने के कुछ घंटे बाद ही भारत को सकारात्मक खबरें मिलने लगी हैं। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को फोन पर इब्राहिम को जीत की मुबारकबाद दी। इसके साथ ही भारत ने कहा है कि यह चुनाव मालदीव में सिर्फ लोकतांत्रिक ताकतों की जीत को ही नहीं दर्शाता, बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों और कानूनी शासन की प्रतिबद्धता को भी दर्शाता है। भारत ने भरोसा दिलाया है कि ‘पड़ोसी प्रथम’ की नीति को ध्यान में रखते हुए मालदीव के साथ संबंध और बेहतर होंगे। 
 

सोलिह की जीत के बाद पूर्व राष्ट्रपति मोहम्मद नशीद ने घोषणा की कि भारतीय सैन्य हेलिकॉप्टर्स (जिसे यामीन हटाना चाहते थे) मालदीव में ही रहने चाहिए। नशीद लोकतांत्रिक तरीके से चुने गए देश के पहले पूर्व राष्ट्रपति हैं। नशीद ने चीन को झटका देते हुए यह भी कहा है कि मालदीव की नई सरकार यामीन के कार्यकाल में शुरू हुए सभी इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स का ऑडिट कराएगी। दरअसल, चीन पर जमीन हड़पने और कई तरह के गंभीर आरोप लगे हैं। उन्होंने कहा कि ये दिखावटी परियोजनाएं लोगों की उम्मीदों को पूरा कर पाने में नाकाम रही हैं। प्रोजेक्ट्स के ऑडिट के साथ-साथ नशीद ने कहा कि नई सरकार इस बात की भी जांच करेगी कि हाल के वर्षों में मालदीव में कितने पैसे आए। 

 

संयुक्त विपक्ष को समर्थन देने के लिए नशीद ने भारत का शुक्रिया अदा किया। नशीद ने आगे कहा, "मैं इस बात को लेकर आशान्वित हूं कि हाल में श्रीलंका और मलेशिया जैसे देशों में जो हुआ, उसे देखते हुए चीन यह समझेगा कि ऐसा क्यों किया जा रहा है।" नशीद ने हाल में उद्घाटन किए गए चीन-मालदीव फ्रेंडशिप ब्रिज का भी जिक्र किया। पूर्व राष्ट्रपति ने कहा कि जब उनकी सरकार थी तो खर्च का अनुमान 77 मिलियन डॉलर था, लेकिन यह यामीन सरकार में बढ़कर 300 मिलियन डॉलर पहुंच गया। 

  
 

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