LOK SABHA ELECTION 2019: डालिए एक नजर मैनपुरी लोकसभा सीट पर

मैनपुरी लोकसभा सीट समाजवादियों के अभेद्द किले के रूप में जानी जाती है। इस सीट पर दशकों से समाजवादी पार्टी का ही कब्जा है। मुलायम सिंह यादव, धर्मेंद्र यादव, तेज प्रताप यादव यहां से सांसद रह चुके हैं। आज़ादी के बाद 1952 से लेकर 1971 तक कांग्रेस के पास ये सीट रही। उसके बाद जनता दल ने इस सीट को जीता। यह जीत महज एक साल ही रही..क्यों कि 1978 में हुए उपचुनाव में कांग्रेस ने इस सीट पर दुबारा जीत हासिल की। यह सीट 1980 में जनता दल के पास गई। लेकिन 1984 की कांग्रेस लहर में दुबारा यह सीट कांग्रेस के खाते में आई, उसके बाद से इस सीट पर समाजवादियों का कब्जा हो गया।

1989 और 1991 में यहां लगातार जनता पार्टी ने जीत तो दर्ज की। लेकिन 1992 में पार्टी गठन करने के बाद मुलायम सिंह यादव ने यहां से 1996 का चुनाव यहां से लड़ा और बड़े अंतर से जीता। उसके बाद 1998, 1999 में भी ये सीट समाजवादी पार्टी के पास ही रही। 2004 में मुलायम ने एक बार फिर इस सीट पर वापसी की, लेकिन बाद में सीट को छोड़ दिया। 2004 में धर्मेंद्र यादव यहां से उपचुनाव में जीते। 2009 के चुनाव में मुलायम यहां दोबारा लौटे और सीट को अपने पास ही रखा। 2014 के चुनाव में भी मुलायम ने यहां से जीत दर्ज किया, लेकिन उन्होने 2014 में आज़मगढ़ सीट से भी चुनाव लड़ा था। इसलिए वो मैनपुरी सीट अपने पोते तेज प्रताप को दे दी, उपचुनाव में तेज प्रताप यादव यहां से जीते।

मैनपुरी में आती हैं 5 विधानसभा सीटें

मैनपुरी लोकसभा सीट के अंतर्गत 5 विधानसभा सीटें आती है। जिसमें एक सीट इटावा की जसवंत नगर है। बाकी 4 सीटें  मैनपुरी, भोगांव, किषनी, करहल मैनपुरी जिले में आती हैं। 2017 में हुए विधानसभा चुनाव में बीजेपी के पास केवल भोगांव सीट ही आई। बाकी चारो सीटें समाजवादी पार्टी के खाते में चली गई। वहीं बात करें 2014 लोकसभा चुनाव कि तो इस सीट पर मुलायम सिंह यादव ने बीजेपी के शत्रुघन सिंह चौहान को 3 लाख वोटों के बड़े अंतर से हराया था, लेकिन बाद में मुलायम से यह सीट छोड़ दी और उनके पोते तेज प्रताप यादव इस सीट से चुनाव लड़े। तेज प्रताप ने बीजेपी के प्रेम सिंह शाक्य को हराया।

जानिए मैनपुरी से कितने मतादाता करेंगे वोटिंग


2019 में होने वाले लोकसभा चुनाव में मैनपुरी सीट पर कुल 17 लाख 2 हज़ार 320 वोटर अपने मत का प्रयोग करेंगे। जिनमें पुरूष मतदाताओं की संख्या 9 लाख 20 हज़ार 70 है। जबकि महिला वोटरों की संख्या 7 लाख 82 हज़ार 192 है। वहीं ट्रांस जेंडर वोटरों की संख्या 58 है।

 

डालिए एक नजर 2014 के लोकसभा चुनाव पर


मैनपुरी लोकसभा सीट पर 2014 में हुए चुनाव पर नज़र डालें तो इस सीट पर मुलायम सिंह यादव ने कब्जा जामाया था। मुलायम सिंह यादव ने बीजेपी के शत्रुघन सिंह चौहान को 3 लाख से ज्यादा वोटों से हराया था। मुलायम सिंह को 5 लाख 95 हज़ार 918 वोट मिले थे। जबकि बीजेपी के शत्रुघन सिंह चौहान को 2 लाख 31 हज़ार 252 वोट मिले थे। वहीं तीसरे नंबर पर बसपा के संघमित्रा मौर्य थे। जिन्हे 1 लाख 42 हज़ार 833 वोट मिले थे। इसके बाद उपचुनाव भी हुए थे, क्योंकि मुलायम सिंह यादव ने 2 सीटों से चुनाव लड़ा था और वो दोनों सीटों से चुनाव जीते थे।

वहीं मुलायम सिंह यादव के इस सीट को छोड़ने के बाद यहां उपचुनाव हुए। उपचुनाव में समाजवादी पार्टी के तीसरी पीढ़ी के उम्मीदवार तेज प्रताप यादव को यहां से चुनाव लड़ाया गया। तेज प्रताप के खिलाफ बीजेपी ने प्रेम सिंह शॉक्य को चुनावी मैदान में उतारा, लेकिन तेज प्रताप को मुलायम की सीट का फायदा मिला और वो उपचुनाव जीत गए।

डालिए एक नजर 2009 के लोकसभा चुनाव पर


2009 में मैनपुरी लोकसभा सीट पर हुए चुनाव में समाजवादी पार्टी के मुखिया मुलायसिंह यादव ने ही जीत दर्ज की थी। मुलायम सिंह यादव ने बसपा के विनय शॉक्य को हराया था। 2009 में मुलायम सिंह यादव को कुल 3 लाख 92 हज़ार 308 वोट मिले थे, जबकि विनय शाक्य को 2 लाख 19 हज़ार 239 वोट मिले थे। वहीं तीसरे नंबर पर बीजेपी की तृप्ति शाक्य रही। तृप्ति को महज़ 56 हज़ार 265 वोट मिले थे।

डालिए एक नजर 2004के लोकसभा चुनाव पर


बात करें 2004 लोकसभा में हुए चुनाव कि तो मैनपुरी सीट पर 2004 में भी मुलायम सिंह यादव ने ही जीत दर्ज कि थी। लेकिन जीत दर्ज करने के बाद मुलायम सिंह ने अपने भतीजे धर्मेंद्र यादव के लिए ये सीट छोड़ दी थी। मुलायम सिंह यादव को 4 लाख 60 हज़ार 470 वोट मिले थे, जबकि दूसरे नंबर पर बसपा के अशोक शाक्य थे। अशोक को 1 लाख 22 हज़ार 600 वोट मिले थे। वहीं तीसरे नंबर पर बीजेपी के बलराम सिंह यादव थे। बलराम सिंह को 1 लाख 11 हज़ार 153 वोट मिले थे...इस सीट पर दुबारा उपचुनाव हुआ। उपचुनाव में धर्मेंद्र यादव ने जीत दर्ज की।

मुलायम सिंह यादव ने इस सीट को छोड़ दिया। जिसके बाद इस सीट पर उपचुनाव हुआ। उपचुनाव में सपा के दूसरी पीढ़ी के नेता धर्मेंद्र यादव यहां से चुनाव लड़े और भारी मतों से चुनाव जीत गए। धर्मेंद्र यादव को 3लाख 48 हज़ार 999 वोट मिले, जबकि बीएसपी के अशोक शॉक्य को महज 1लाख 69 हज़ार 286 वोट मिले। 

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