महागठबंधन: कांग्रेस का हाथ झटकने की तैयारी में सपा-बसपा

लखनऊ: अगामी लोकसभा चुनावों में उत्तर प्रदेश में सपा-बसपा का गठबंधन होना यकीनी है, साथ में यह भी चर्चा है कि कांग्रेस और रालोद भी मिल सकते हैं। मगर गत दिनों पेट्रोल-डीजल की कीमतों के विरोध में कांग्रेस और विपक्षी दलों द्वारा आयोजित भारत बंद में सपा-बसपा के शामिल न होने से यह संकेत मिलता है कि ये दोनों पार्टियां कांग्रेस का हाथ झटकने की तैयारी में हैं।

बंद के बाद मायावती ने पेट्रोल-डीजल की कीमतों में वृद्धि के लिए भाजपा के साथ कांग्रेस को भी जिम्मेदार ठहराया। इससे लगता है कि आपसी गठबंधन में कांग्रेस को साथ नहीं लेना चाहती है। मायावती ने कहा कि कांग्रेस ने ही यूपीेेए-2 के शासन काल में पेट्रोल को सरकार नियंत्रण से मुक्त कराने का फैसला लिया था। इसके बाद केन्द्र में बनी भाजपा सरकार ने उसी आर्थिक नीति को आगे बढ़ाया, इसलिए भाजपा और कांग्रेस दोनों ही मूल्य वृद्धि के लिए जिम्मेदार है।

उत्तर प्रदेश में हुए लोकसभा उपचुनावों में सपा, बसपा, कांग्रेस और रालोद गठबंधन की जीत से स्पष्ट हुआ था कि 2019 के लोकसभा चुनावों में यही गठबंधन  भाजपा को पटखनी देगा। मगर मायावती ने जिस तरह कांग्रेस को कोसा उससे बसपा का नया रुप दिखाई दिया। मायावती के बयान के बाद राहुल गांधी खुलकर विपक्षी गठबंधन की पैरवी कर रहे हैं। मगर सपा-बसपा की योजना में कांग्रेस फिट नहीं बैठ रही है और कांग्रेस से दूरी बनाने के पक्ष में हैं। सपा-बसपा उत्तर प्रदेश की अधिकांश सीटों पर खुद चुनाव लड़ना चाहती है और कांग्रेस को 5-7 सीटें देने के पक्ष में है।

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