मौत का प्रदूषण: बुड्ढे नाले में बिना ट्रीट किए एनिमल वेस्ट डाल रहा स्लाटर हाऊस

लुधियाना(नितिन धीमान):सतलुज दरिया का पानी पीने वाले लोगों को यह बात झकझोर देगी कि लुधियाना में सड़क किनारे सैंकड़ों की तादाद में बकरे, मुर्गे, मछलियां काटने वाले इनकाखून, हड्डियां व पंख सीधे बुड्ढे नाले में फैंक रहे हैं जोकि आगे जाकर सतलुज दरिया के पानी में मिक्स हो जाता है जिस कारण सतलुज का पानी पीने वाले लोग गंभीर इंफैक्शन से ग्रसित हो रहे हैं। 

राजस्थान सरकार ने पंजाब सरकार पर पर्यावरण को लेकर अदालत में जो केस दर्ज किया है उसमें बताया गया है कि इंडस्ट्रीयल जहरीले पानी के साथ एनिमल वेस्ट भी पीने के पानी को प्रदूषित कर रहा है। नगर निगम ने हम्बड़ा रोड पर जो स्लाटर हाऊस बनाया है वह भी सिर्फ नाम का ही है। यहां सुबह बकरे कटने के लिए आते हैं और इनका खून बिना ट्रीट किए सीधा बुड्ढे नाले में बहाया जा रहा है। बुड्ढे नाले में जाते ही खून नीचे बैठ जाता है। बेकार हुई हड्डियां व पंख भी पानी में गल कर मिक्स हो रहे हैं। इनसे प्रदूषित हो रहे बुड्ढे नाले के बारे में पंजाब स्टेट ह्यूमन राइट कमीशन की रिट पर पंजाब पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड और नगर निगम ने पंजाब व हरियाणा हाईकोर्ट में दाखिल की गई रिपोर्ट में माना है कि एनिमल वेस्ट सीधा बुड्ढे नाले में जा रहा है।


कई सालों से बंद पड़ा है सरकारी स्लाटर हाऊस का एफुलैंट ट्रीटमैंट प्लांट 
सरकारी स्लाटर हाऊस का एफुलैंट ट्रीटमैंट प्लांट कई सालों से बंद पड़ा है। ‘पंजाब केसरी’ की टीम ने जब स्लाटर हाऊस का दौरा किया तो ई.टी.पी. बंद मिला और वहां से एक सीधा पाइप बुड्ढे नाले में निकाला हुआ था। डेयरी काम्पलैक्स नजदीक होने के कारण बुड्ढे नाले में भैंसें भी नहाती हुई नजर आईं। डाक्टरों के मुताबिक एक जानवर का खून दूसरे जानवर को लगने से इंफैक्शन कर जाता है लेकिन यहां भैंसें बुड्ढे नाले में नहा रही हैं और इनका दूध लोगों तक पहुंचाया जा रहा है जिसे कोई देखने वाला नहीं। 

रोजाना 45 हजार मुर्गे और 10 हजार कटते हंै बकरे
लुधियाना में हर रोज करीब 10 हजार बकरे और 45 हजार मुर्गे कटते हैं। पंजाब केसरी की टीम ने जब सर्वे किया तो &0 ऐसी बड़ी दुकानें मिलीं, जो मुर्गे काटती हैं। अंदाजन सबने रोजाना 1500 से 2000 मुर्गे काटकर बेचने के बारे में बताया। इनकी रोजाना इतनी बिक्री भी हो जाती है। वजह, लुधियाना में 700 के आसपास छोटे-बड़े नॉन-वैज ढाबे, 300 रैस्टोरैंट, 100 से ऊपर होटल, मैरिज पैलेस, अहाते और सैंकड़ों रेहडिय़ां हैं जहां रोजाना नॉन-वैज बिकता है। इनमें से कुछ लोग तो बोन-लैस चिकन भी बेचते हैं। हाल ही में नॉन-वैज बिकने का डाटा लुधियाना नॉन-वैज होलसेल एसोसिएशन की ओर से दिया गया है। इनकी जो हड्डियां होती हैं उन्हें कूड़े के ढेर में डालकर बुड्ढे नाले में फैंक दिया जाता है। 

एक जानवर के सामने दूसरे जानवर को नहीं काट सकते 
म्यूनिसिपल एक्ट के मुताबिक एक जानवर को दूसरे जानवर के सामने नहीं काट सकते लेकिन शहर में दुकानों पर धड़ाधड़ मुर्गे व बकरे काटे जा रहे हैं। कटने वाले जानवर से दूसरे जानवर को इंफैक्शन न हो, उससे बचाने के लिए नियम के मुताबिक एक बकरे या मुर्गे को काटकर उस जगह को धोकर साफ  करना होता है लेकिन ऐसा करने के लिए किसी के पास वक्त नहीं है। एक साथ इकट्ठा खून पानी के साथ बहाकर सीवरेज के जरिए बुड्ढे नाले तक पहुंचाया जाता है जोकि इसके बाद सीधा सतलुज में पहुंच जाता है।

बिना जांचे 200 रुपए में हो जाती है बकरे की फिजीकल फिटनैस 
नगर निगम के स्लाटर हाऊस में सिर्फ बकरे कटने के लिए आते हैं। यहां पशु पालन विभाग के डाक्टर भी मौजूद होते हैं लेकिन सिर्फ  आई वाश के लिए रोजाना 15 से 20 बकरे दुकानदार लेकर आते हैं जबकि स्लाटर हाऊस में रोजाना 100 से 125 बकरे कटने का आंकड़ा बताया जा रहा है। बाकी के बकरों की फिजीकल फिटनैस 200 रुपए देकर हो रही है। 

स्किन इंफैक्शन के साथ बढ़ रही लिवर डैमेज की बीमारी
डाक्टरों के मुताबिक जानवरों के खून से स्किन की इंफैक्शन सबसे पहले होती है। जहां तक पानी में खून मिक्स होने का सवाल है तो इससे पेट संबंधी और लिवर डैमेज होने की बीमारियां तेजी से फैलती हैं।

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