Kundli Tv- क्या पूजा-पाठ के बाद भी आपका Time चल रहा है बुरा तो करें ये काम

गणपति मंत्र उत्तर से दक्षिण तक सभी मांगलिक कार्यों में बोले जाते हैं। नगर-नगर में गणेश मंदिर हैं जिनमें सिंदूर, मोदक, दूर्वा और गन्ने चढ़ाए जाते हैं। सिंदूर शौर्य के देवता के रूप में, मोदक तृप्ति और समृद्धि के देवता के रूप में तथा दूर्वा और गन्ना हाथी के शरीर वाले देवता के रूप में गणेश को प्रिय माना जाता है। घर में या व्यापार स्थल पर मुखिया के अंगूठे की आकृति से लेकर बारह अंगुल तक की गणेश प्रतिमा पूजा के लिए काम में ली जानी चाहिए। सबसे पहले स्नान-ध्यान आदि से फ्री होकर स्वयं को -‘‘अपवित्र: पवित्रो वा सर्वावस्थांगतोपिवा।’’ आदि मंत्र से जल का प्रेक्षण करके पवित्र हो जाएं तथा गणेश पूजन का संकल्प लेकर गणेश जी का आह्वान करें। शास्त्रों में बारह प्रकार के विघ्रहर्ता गणेश का उल्लेख मिलता है। ये गणेश निम्र हैं-

सिंदूर वर्ण गणेश
ऊंकार गणेश
श्री गजानन गणेश
श्री कृष्णपंगाक्ष गणेश
एकदंत गणेश
शूपवर्ण गणेश
चतुर्भुज गणेश
महाकाय गणेश
भालचंद्र गणेश
मंगलमूर्ति गणेश(इन्हें महाराष्ट्र में मंगलमूर्ति मौर्या कहा जाता है)
वक्रतुंड गणेश
लंबोदर गणेश

श्री गणेश का बीजाक्षर ‘ग’ है और वाहन मूषक है। श्री गणेश के निम्र मंत्रों का जाप किया जाता है।

लक्ष्मी प्राप्ति एवं ऋण मुक्ति के लिए
श्री ह्रीं क्लीं तत्पुरुषाय विद्यहे,
वक्रतुंडायधीमहि तन्नोदन्ति प्रचोदयात।

वशीकरण के लिए
ॐ श्रीं गं सौम्याय गणपतये 
वरवरद सर्वजनं मे वशमानय स्वाहा।

संकट नाश के लिए
ॐ नमो हेरम्ब मदमोहित मम 
संकटान निवारय निवारय स्वाहा।

ऋण नाश के लिए
ॐ गणेशं ऋणं छिन्धि वरण्यं हूं नम: फट।

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