गठबंधन की आस लगाए बैठी AAP पर बढ़ा उम्मीदवार घोषित करने का दबाव

चंडीगढ़(रमनजीत सिंह): पंजाब विधानसभा में मुख्य विरोधी पक्ष आम आदमी पार्टी ने लोकसभा चुनाव के लिए प्रत्याशी घोषित करने के मामले में देशभर में पहल करते हुए अक्तूबर, 2018 में ही पांच प्रत्याशियों की घोषणा कर दी थी। इसके साथ ही ऐलान किया था कि दिसंबर, 2018 तक सभी प्रत्याशी घोषित कर दिए जाएंगे, लेकिन राजनीतिक उथल-पुथल ऐसी बढ़ी कि ‘आप’ द्वारा प्रत्याशी घोषित करने को टालना पड़ा।


केंद्रीय नेतृत्व ने पंजाब से कहा, जल्द फैसला ले
मुख्य विरोधी पक्ष होने के बावजूद आम आदमी पार्टी पंजाब में गठबंधन साथी तलाशने में लगी रही। कांग्रेस, बहुजन समाज पार्टी और शिरोमणि अकाली दल टकसाली के साथ बातचीत हुई, गठबंधन की संभावनाएं बढ़ीं और फिर धूमिल भी हो गईं, लेकिन अब दबाव बढ़ गया कि प्रत्याशी घोषित किए जाएं। तर्क यह है कि प्रत्याशियों को चुनाव प्रचार के लिए समय हासिल हो पाए। पार्टी सूत्र बताते हैं कि दिल्ली में सभी सीटों पर प्रत्याशी घोषित किए जाने के बाद केंद्रीय नेतृत्व ने पंजाब टीम से भी कहा है कि जल्द से जल्द फैसला लिया जाए। 

9 में से 5 विधायक होने के बावजूद बठिंडा पैंडिंग
गठबंधन की संभावनाएं ही थीं कि ‘आप’ ने बठिंडा जैसी अहम सीट पर प्रत्याशी घोषित नहीं किया। संगरूर की ही तरह 9 विधानसभा क्षेत्रों पर आधारित बठिंडा सीट की भी 5 विधानसभा सीटों  बठिंडा देहाती, मौड़, तलवंडी साबो, मानसा और बुढलाडा पर ‘आप’ के विधायक हैं, जबकि शिअद और कांग्रेस के दो-दो हैं। ‘आप’ विधायक 11 से 20 हजार के बड़े वोट अंतर से विजयी हुए थे। सशक्त आंकड़ों के बावजूद ‘आप’ ने बठिंडा से प्रत्याशी ढूंढने में काफी समय लगा दिया, जिसका कारण ‘आप’ के बागी विधायकों के धड़े को माना जा रहा है। मानसा और मौड़ के विधायक खैहरा के समर्थन में हैं, जबकि बठिंडा में ही बागी धड़े की कन्वैंशन में अ‘छी-खासी भीड़ जुटी थी। उधर, ‘आप’ के ही बागी विधायक खैहरा पंजाब एकता पार्टी और गठबंधन की तरफ से 12 सीटों पर उम्मीदवार चुनाव मैदान में उतार चुके हैं।

मालवा का वर्चस्व
आम आदमी पार्टी की पंजाब में राजनीतिक शुरूआत के समय से ही मालवा का वर्चस्व रहा है, यानी मालवा हर फैसले और रणनीति में आगे रहा है। 2017 विधानसभा चुनाव नतीजों में भी कुल 20 में से 16 विधायक मालवा से हैं, जबकि 2 दोआबा और 2 पुआध से हैं। माझा में आम आदमी पार्टी लोकसभा और विधानसभा चुनाव में शून्य पर ही टिकी रही थी। लोकसभा चुनाव के लिए गत वर्ष घोषित प्रत्याशियों में माझा की अमृतसर, दोआबा की होशियारपुर और पुआध की एकमात्र सीट श्री आनंदपुर साहिब से प्रत्याशी घोषित किया गया था, जबकि मालवा की दो सीटों संगरूर और फरीदकोट से प्रत्याशी घोषित किए गए।

ऐसा नहीं है कि प्रत्याशी चयन में कोई परेशानी है। हमारी गठबंधन को लेकर बातचीत चल रही थी और बातचीत दौरान किसी की ओर से भी प्रत्याशी घोषित किया जाना अनैतिक व्यवहार है। बठिंडा सीट शिअद टकसाली के लिए छोडऩा चाहते थे ताकि बीरदविंदर सिंह वहां से प्रत्याशी हों, लेकिन ऐसा नहीं हो पाया। अब जल्द बठिंडा समेत सभी सीटों पर प्रत्याशी घोषित कर दिए जाएंगे। 
-भगवंत मान, प्रदेश प्रधान, आम आदमी पार्टी

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