महान व्यक्तित्व के स्वामी थे लाला जगत नारायण जी

अमर शहीद लाला जगत नारायण जी की बरसी (9 सितम्बर) के अवसर पर मैं उन्हें सलाम करता हूं और उन्हें श्रद्धांजलि अॢपत करता हूं। हम (हमारे परिवार के सदस्य) उनको आम तौर पर सामाजिक, प्रशासनिक तथा निजी समस्याओं के बारे में मिलते रहते थे और हर बार हमें समाधान मिल जाता था। एक बार मेरी बहन के परीक्षा परिणाम में काफी देरी हो गई और प्रश्र उसके कीमती वर्ष का था। हमने लाला जी को लिखा और उन्होंने इस बाबत हिन्द समाचार में लिखा तथा एक सप्ताह के भीतर ही परिणाम घोषित कर दिया गया। 

इतना ही नहीं, हम आपातकाल के समय भी कांग्रेसियों की आम जनता के साथ ज्यादतियों तथा ‘गुंडागर्दी’ के बारे में उन्हें लिखने की हिम्मत करते थे और वह इसे हिन्द समाचार में छापते थे। इसका परिणाम यह हुआ कि खुद पुलिस ने हमसे सम्पर्क किया और उपद्रवियों पर अंकुश लगाया। मैं यहां उनके समझाने, सिखाने तथा सामाजिक मुद्दों की वकालत के उनके तरीके के बारे में एक घटना का जिक्र करना चाहूंगा: 

1970 के दशक में वह आर्य युवक परिषद द्वारा आयोजित एक समारोह की अध्यक्षता करने के लिए मोगा आए थे। मैं चूंकि पहले कभी उनसे मिला नहीं था, इसलिए उनकी एक झलक पाने के लिए अत्यंत उत्सुक था। मैं जलसे में गया और उपस्थिति को सम्बोधित करते उन्हें सुना। आर्य युवक परिषद द्वारा उठाया गया मुद्दा शादियों में ‘बारातियों’ की गिनती कम करने तथा परोसे जाने वाले व्यंजनों की संख्या कम से कम करने का था। 

परिषद ने इस सामाजिक बुराई के खिलाफ अभियान छेड़ा था और उसे उस समय समर्थन मिला था। लोग उनसे डरते थे। लाला जी ने तब एक अन्य सामाजिक मुद्दा अपने तौर पर उठाया और कहा कि शादी के काबिल जो युवा अपने विवाह में दहेज लेने के इच्छुक नहीं हैं वे अपना हाथ ऊपर उठाएं। काफी उपस्थिति में से केवल 3-4 लोगों ने अपने हाथ ऊपर उठाए। उस समय उन्होंने अपने चेहरे पर मुस्कुराहट लाते हुए कहा कि ‘ठीक है, मैं समझता हूं कि आपको दहेज लेना चाहिए क्योंकि पुरुष होने के नाते यह आपका अधिकार है। इसलिए वे सभी लोग, जो दहेज लेना चाहते हैं अपना फोटो मुझे भेजें और अपना हाथ ऊपर उठाएं। मैं उनके लिए मोटे दहेज की व्यवस्था करूंगा।’ 

जैसा कि होना था, श्रोताओं के बीच हंसी की फुहार फूट पड़ी और किसी ने भी आगे आकर अपना हाथ ऊपर नहीं उठाया। उस समय लाला जी ने फिर कहा कि यदि आप दहेज लेना नहीं चाहते तो इस बारे शपथ लेने में क्या खराबी है। उन्होंने फिर घोषणा की कि जो युवा किसी भी तरह का दहेज न लेने का वायदा करते हैं, अपना हाथ ऊपर उठाएं। इस बार लगभग सभी ने अपना हाथ पूरा ऊपर उठा दिया। ऐसा था उनका जागरूकता पैदा करने तथा लोगों को सबक देने का तरीका। समारोह समाप्त होने के बाद आर्य समाज मंदिर में मुझे उनसे निजी तौर पर मिलने का अवसर प्राप्त हुआ। मैंने उनसे कई मुद्दों पर चर्चा की और उनसे काफी कुछ सीखा जो मैं आज भी नहीं भूला हूं, जिसे मैं पत्रकारिता तथा रोजमर्रा के जीवन में भी अपनाता हूं। ऐसे महान व्यक्तित्व थे लाला जगत नारायण जी।-एस.के. मित्तल

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