Kundli Tv- नाग पंचमी: धनवान बनने के गुप्त रहस्यों में से एक है ये उपाय

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2 अगस्त को नागपंचमी का पर्व मनाया जाएगा। वेद और पुराणों में नागों का उद्गम महर्षि कश्यप और उनकी पत्नी कद्रू से माना गया है। भगवान विष्णु भी शेषनाग की शैय्या पर लेटे हैं। इसलिए भी इनकी पूजा होती है। हिन्दू धर्म में हर पशु-पक्षी को किसी न किसी देवी या देवता से जोड़ा गया है। भगवान शिव के गले में नाग होने से इसकी पूजा आदिकाल से की जा रही है और इस पर्व को नाग पंचमी कहा जाता है। स्कंद पुराण के अनुसार श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि पर नाग पूजन से मनोकामना पूर्ण होती हैं और धन की इच्छा भी पूरी होती है। माना जाता है की धनवान बनने के गुप्त रहस्यों में से एक है नाग पूजा। 


भारत के कई क्षेत्रों में व्रत भी रखे जाते हैं। इस पंचमी पर कई अंचलों में द्वारों पर भित्ति चित्रों की तरह विषधारी नाग बनाए जाते हैं तथा उनका पूजन किया जाता है। नारद पुराण में भी सर्पदंश से बचाव हेतु नाग व्रत का विधान बताया गया है। ग्रामीण अंचलों में इस दिन दीवारों पर सात नागों के चित्र बना कर उनका पूजन किया जाता है। एक रस्सी में 7 गाठें लगाकर सर्प की आकृति बनाई जाती है और विधिवत् पूजन किया जाता है।


इसके अतिरिक्त नवनाग स्तोत्र का पाठ किया जा सकता है। चांदी का नाग बना कर मध्यमा में धारण किया जा सकता है। शिवलिंग पर तांबे का सर्प अनुष्ठानपूर्वक चढ़ाया जा सकता है। तांबे के लोटे में नाग के जोड़े डाल कर, बहते जल में प्रवाहित किए जा सकते हैं। इस दिन राहु यंत्र भी रखा जा सकता है।  काल सर्प दोष निवारण यंत्र स्थापित एवं धारण किया जा सकता है। 

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