Kundli Tv- जानें, क्यों है तीज सुहागिनों के लिए खास

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PunjabKesariआज सोमवार दिनांक 13.08.18 को हरियाली तीज का पर्व मनाया जाएगा। सावन महीने के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को हरियाली तीज कहते हैं। यह पर्व शिव-पार्वती के पुर्नमिलन हेतु मनाया जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार सावन महीने के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि के दिन भगवान शिव ने देवी पार्वती की तपस्या से प्रसन्न होकर उन्हें दर्शन दिया और साथ ही अपनी पत्नी बनाने का भी वरदान दिया था। शिव को पति के रूप में पाने के लिए देवी पार्वती ने 107 जन्म लिए थे। अंततः देवी के कठोर तप व 108 वें जन्म में शिव ने पार्वती को पत्नी के रूप में इसी दिन स्वीकार किया था। प्रेम की मिसाल और प्रेम को पाने के हठ की हद भी यही रही है की देवी पार्वती के 108 वें जन्म में महादेव ने उन्हें अपनी पत्नी के रूप में स्वीकार किया। 

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शिव के वरदान से देवी पार्वती के मन में हरियाली छाई और वह आनंद से झूम उठीं इसलिए इस तृतीया तिथि को हरियाली तीज के नाम से जाना जाता है। जनश्रुति के अनुसार इस दिन मां पार्वती के अवतार तीज माता या तीजड़ी के कारण उनकी उपासना का विशेष महत्व भी है। इस दिन मां पार्वती तीज माता के रूप में अवतरित हुई थीं। इस दिन शंकर और पार्वती को प्रसन्न करने के लिए तीज माता की उपासना की जाती है। महिला व्रत रखकर पति की दीर्घायु की कामना करती हैं। कुंवारी कन्याएं अपने मनोवांछित वर को पाने की प्रार्थना भी करती हैं। इस दिन शिवालय में पार्वती के श्रृंगार करने का और उन पर मेहंदी, सिंदूर और खीरा चढ़ाने का बड़ा महत्व है। 

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अर्द्ध गोले अर्थात आधे नारियल पर पार्वती का चित्र स्थापित करके उनकी आराधना की जाती है। कथा सुनते समय पति या प्रेमी का ध्यान किया जाता है पति की दीर्घायु या प्रेमी को पाने की कामना शंकर-पार्वती से की जाती है। हरियाली तीजा के विशेष पूजन, व्रत और उपाय से लव मैरेज में सक्सेस मिलती है, जीवनसाथी को लंबी आयु प्राप्त होती है तथा दांपत्य जीवन से विवाद खत्म होते हैं।

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स्पेशल पूजन विधि: सफ़ेद कपड़े पहनकर शिवालय जाएं। शिवलिंग और पार्वती का विधिवत षोडशोपचार पूजन करें। जल, दूध, दही, शहद, घी, चीनी, जनेऊ, चंदन, रोली, बिल्व पत्र, भांग, धतूरा, धूप, दीप व दक्षिणा के साथ शंकर पार्वती का पूजन करें। गौघृत का दीप करें, चंदन की अगरबत्ती जलाएं, सफ़ेद फूल चढ़ाएं, शिवलिंग पर चंदन से त्रिपुंड बनाएं, ऋतु फल चढ़ाएं, चावल की खीर का भोग लगाएं, पान, सुपारी, नारियल व दक्षिणा अर्पित करें। पार्वती को मेहंदी, सिंदूर, कुंकुम और खीरा, ककड़ी अर्पित करें। मेहंदी चढ़ाते समय अपने जीवनसाथी या लवर का ध्यान करें और उसी मेहंदी से शिवालय में अपने पति या लवर का नाम अपनी हथेली पर लिख लें और तथा इस विशेष मंत्र का 1 माला जाप करें। 

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स्पेशल मंत्र: ॐ शिवप्रियायै नमः॥
सुबह का स्पेशल मुहूर्त: सुबह 10:45 से सुबह 11:45 तक।
शाम का स्पेशल मुहूर्त:शाम 18:00 से शाम 19:00 तक।

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गुड हैल्थ के लिए:शिव-पार्वती पर चढ़ी खीर का सेवन करें।
 
गुडलक के लिए:शिव-पार्वती पर चढ़ा सदाबहार का फूल जेब में रखें। 

विवाद टालने के लिए:शिव-पार्वती पर चंदन का लेप चढ़ाएं।  

नुकसान से बचने के लिए:शिव-पार्वती पर आंक के फूल चढ़ाएं।

प्रोफेशनल सक्सेस के लिए: शिव-पार्वती पर धतूरा चढ़ाएं। 

एजुकेशन में सक्सेस के लिए:शिव-पार्वती पर चढ़ा कनेर का फूल टेक्स्ट बुक के बीच में रखें। 

बिज़नेस में सफलता के लिए:शिवलिंग पर भांग चढ़ाएं।

पारिवारिक खुशहाली के लिए:पार्वती पर चढ़े सिंदूर से घर के मेनगेट पर तिलक करें।

लव लाइफ मे सक्सेस के लिए: शिव-पार्वती पर चढ़ी मेहंदी हाथों में लगाएं। 

मैरिड लाइफ में सक्सेस के लिए:पति-पत्नी एक साथ शिव-पार्वती पर कमल का फूल चढ़ाएं।

आचार्य कमल नंदलाल
ईमेल: kamal.nandlal@gmail.com

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