Kundli Tv- शादी से पहले वर-वधु की कुंडली मिलाते समय रखें इन बातों का खास ध्यान, वरना...

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हिंदू धर्म में लड़का-लड़की की शादी से पहले उनकी कुंडली का मिलान किया जाता है। कहा जाता है कि कुंडली के मिलान के बिना कोई भी अपने लड़के-लड़की की शादी नहीं करता। ज्योतिष की मानें तो कुंडली के मिलान के बाद ही यह पता चलता है कि लड़का-लड़की के लिए ये शादी कितनी उपयोगी साबित होगी। एेसा कहा जाता है कि जिन लोगों की कुंडली के ज्यादा गुण मिलते है, उनका विवाह उत्तम माना जाता है। तो वहीं इसके विपरीत अगर कुंडली के दोष कम मिलते हों तो एेसे में शादी हो पाना संभव नहीं होता। परंतु ज्योतिष में एेसे लोगों के लिए कुछ उपाय बताया गए हैं, जिनसे कुंडली में मौज़ूद सभी दोष आदि खत्म हो जाते हैं और विवाह करने में कोई परेशानी नहीं होती।


यहां जानें, कुंडली मिलान करते समय किन बातों का ध्यान रखना ज़रूरी होता है-

मंगल दोष
अगर ज्योतिष की मानें तो लड़का-लड़की की शादी के लिए कुंडली मिलान में मुख्य रूप से मंगल दोष पर खास विचार किया जाता है। इसके अनुसार अगर जन्म कुंडली में प्रथम, द्वितीय, चतुर्थ, सप्तम, अष्टम या द्वादश स्थान में मंगल हो तो कुंडली में मंगल दोष माना जाता है।

इस तरह की कुंडली से बचें
बता दें कि कुंडली में लग्न, चंद्र और कभी-कभी शुक्र की राशि से भी मंगल की उपरोक्त स्थितियों का विचार किया जाता है। मंगल दोष युक्त और शनि दोष युक्त कुंडली ही विवाह संबंध के लिए सही मानी जाती है। इसलिए इन बातों का ध्यान ज़रूर रखें।

कुंडली
माना जाता है कि अगर मंगल अपनी उच्च राशि मकर में, स्वराशि मेष या वृश्चिक में या मित्र सूर्य की राशि सिंह में, गुरु की राशि धनु या मीन में से किसी भी राशि में स्थित हो तो वह ज्यादा दोषकारक नहीं होता। अगर मंगल का गुरु पूर्ण दृष्टि 5, 7, 9 वीं से देखता हो तो भी मंगलदोष नष्ट हो जाता है ।

दुष्प्रभाव
जन्म कुंडली में प्रथम, चतुर्थ, सप्तम और द्वादश भाव में स्थित मंगल के सप्तम स्थान पर पूर्ण दृष्टि और स्थिति होने के कारण वह ज्यादा दुष्प्रभाव देता है 

सुख में बाधक
अष्टम स्थान जीवन साथी यानि की पति-पत्नी का कुटुंब माना जाता है। उस पर प्रथम या द्वितीय भाव में मंगल की इस दृष्टि का पड़ना कुटुंब सुख में बाधक बनता है। किंतु उस पर गुरु की दृष्टि या युति से यह दोष नष्ट हो जाता है।

कैसे समझे दोनों की कुंडली
ज्योतिष के मुताबिक लड़का-लड़की की कुंडली को 10 प्रकार से मिलाया जाता है और इन 10 प्रकारों का अपना-अपना विभिन्न महत्व होता है। केवल मांगलिक देखकर ही विवाह तय नहीं किया जाता इसके अलावा दूसरे ग्रहों की चाल, दृष्टि, समय और ऊंच-नीच को भी देखा जाता है।

ज्योतिष शास्त्र में मंगल अग्नि तत्व का ग्रह है जबकि बुध पृथ्वी तत्व का, इसलिए इनका मेल होना संभव नहीं होता। लेकिन मंगल, सूर्य और मंगल, गुरु में अच्छा मेल रहता है। इसके अलावा मंगल और शनि का मेल नहीं बैठता। अगर एक कुंडली में महा दरिद्र योग हो तो उसके योग्य संबंध होने से लाभ की बजाए हानि ही होती है।

कहा जाता है कि कुंडली मिलान करते समय वर-वधु दोनों की कुंडलियों के लग्न के स्वामी और चंद्र राशि के स्वामी परस्पर मित्र होने पर भी षडाष्टक योग या द्विदार्दाश योग नहीं होना चाहिए। एक कुंडली में संतान योग और दूसरी कुंडली में वन्ध्यत्व योग हो तो उसका परस्पर विवाह नहीं करना चाहिए। इसके अलावा एक में उत्साह, चैतन्य और दुसरे में जड़ता, दरिद्र होने से भी संबंध वर्जित होना चाहिए।
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