Kumbh Mela 2019: पौष पूर्णिमा पर 1 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं ने लगाई संगम में डुबकी

प्रयागराज: कुंभ मेले के दूसरे महत्वपूर्ण स्नान दिवस पौष पूर्णिमा के अवसर पर 21 जनवरी (सोमवार) को लाखों श्रद्धालुओं ने कड़ाके की ठंड के बावजूद गंगा नदी के सर्द पानी में पवित्र डुबकी लगाई। रविवार रात से ही श्रद्धालु संगम इलाके में पहुंचने लगे थे। सूर्योदय से पहले ही कई श्रद्धालु डुबकी लगाकर घाट से बाहर आते नजर आए। अधिकारी बार-बार श्रद्धालुओं से गहरे पानी में नहीं जाने और अपने आस-पास संदिग्ध तत्वों पर नजर रखने तथा पुलिस को इसकी सूचना देने की अपील करते रहे। संगम क्षेत्र में कई स्थानों पर सूर्योदय से पहले कोहरा देखा गया।

पूर्णिमा के साथ ही कल्पवास की शुरूआत हो गई है। पौष पूर्णिमा के महत्व के बारे में स्वामी अधोक्षानंद ने कहा कि पौष पूर्णिमा हिंदुओं के लिए एक महत्वपूर्ण दिन है। इस दिन, देश के विभिन्न हिस्सों से लोग पवित्र डुबकी लगाने के लिए संगम में एकत्र होते हैं। केंद्रीय फूड प्रोसेसिंग उद्योग राज्यमंत्री साध्वी निरंजन ज्योति भी सोमवार को संगम पर मौजूद थीं। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत भी प्रयागराज पहुंचे और सभी 13 अखाड़ों के प्रमुखों से मिलकर उन्हें इसके बाद हरिद्वार में लगने वाले मेले में आने का न्यौता दिया।

एक ऐसा बैंक, जहां चलती है केवल ‘भगवान राम’ की मुद्रा
कुंभ में बिना किसी ए.टी.एम. या चैक बुक वाला एक ऐसा अनोखा ‘राम नाम बैंक’ सेवाएं दे रहा है जहां केवल ‘भगवान राम’ की मुद्रा चलती है और ब्याज के रूप में आत्मिक शांति मिलती है। यह ऐसा बैंक है, जिसमें आत्मिक शांति की तलाश कर रहे लोग करीब एक सदी से पुस्तिकाओं में भगवान राम का नाम लिखकर जमा करा रहे हैं। इस अनूठे बैंक का प्रबंधन देखने वाले आशुतोष वाष्र्णेय के दादा ने 20वीं सदी की शुरूआत में संगठन की स्थापना की थी।

आशुतोष अपने दादा की विरासत को आगे बढ़ा रहे हैं। इस बैंक में विभिन्न आयु वर्गों एवं धर्मों के एक लाख से अधिक खाता धारक हैं। यह बैंक एक सामाजिक संगठन ‘राम नाम सेवा संस्थान’ के तहत चलता है और कम से कम 9 कुंभ मेलों में इसे स्थापित किया जा चुका है। इसके सदस्यों के पास 30 पृष्ठीय एक पुस्तिका होती है, जिसमें 108 कॉलम में वे प्रतिदिन 108 बार ‘राम नाम’ लिखते हैं।

यह पुस्तिका व्यक्ति के खाते में जमा की जाती है। अन्य बैंकों की तरह पासबुक जारी की जाती है। राम नाम को ‘लिखिता जाप’ कहा जाता है। इसे लिखित ध्यान लगाना कहते हैं। विभिन्न धर्मों के लोग उर्दू, अंग्रेजी और बंगाली में भगवान राम का नाम लिखते हैं। ईसाई धर्म का पालन करने वाले पीटरसन दास (55) वर्ष 2012 से भगवान राम का नाम लिख रहे हैं।

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