श्रीकृष्ण जन्माष्टमी: कान्हा के रंग में डूबा पूरा देश, देखें मनमोहक तस्वीरें

नेशनल डेस्क: देश भर में जन्माष्टमी का पर्व श्रद्धा एवं भक्ति के साथ मनाया जा रहा है। इस मौके पर मन्दिरो को आकर्षक ढंग से सजाया गया है। जगह जगह कृष्ण झांकी दर्शन, भजन, गायन, सांस्कृतिक कार्यक्रमो का आयोजन किया गया है। भगवान कृष्ण के दर्शन के लिए देश के कोने-कोने से श्रद्धालु मथुरा-वृन्दावन एवं ब्रज के अन्य धर्मस्थलों की ओर उमड़ रहे हैं। 
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मथुरा के श्रीकृष्ण जन्मस्थान, द्वारिकाधीश मंदिर, वृन्दावन के बांकेबिहारी, राधावल्लभ लाल, शाहबिहारी, राधारमण, अंग्रेजों के मंदिर के नाम से प्रसिद्ध इस्कॉन मंदिर, 21वीं सदी में बनाए गए स्नेह बिहारी व प्रेम मंदिर, बरसाना के लाडि़ली जी, नन्दगांव के नन्दबाबा मंदिर, गोकुल के नन्दभवन हर तरफ कान्हा के जन्म को लेकर उल्लास छाया हुआ है। 
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वहीं श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर सुरक्षा के खासे प्रबंध किए गए हैं। सोमवार की रात्रि में भगवान के जन्म के अवसर 12.00 बजे से 12.10 बजे तक प्राकट्योत्सव, 12.15 से 12.30 बजे तक महाभिषेक कराया जाएगा। तत्पश्चात 12.40 से 12.50 बजे तक श्रृंगार आरती और फिर 1.30 बजे तक दर्शन होंगे।  

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द्वारिकाधीश मंदिर में सुबह 6.00 से 6.15 बजे मंगला, 6.30 से श्रृंगार और 8.30 बजे से ग्वाल राजभोग के दर्शन होंगे। शाम को 7.30 बजे से भोग संध्या आरती और शयन के दर्शन होंगे। रात को 10 बजे से जागरण और 11.45 बजे भगवान जन्म के दर्शन होंगे। 

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दक्षिण भारतीय परंपरा के रंगजी मंदिर में सोमवार रात जन्मोत्सव मनाने के बाद अगले दिन नंदोत्सव के दौरान लट्ठा के मेला का आयोजन होगा। अन्य मंदिरों में जन्माष्टमी के लिए तैयारियां की गयी हैं।

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इस्कॉन मंदिर के प्रवक्ता ने बताया कि जन्मोत्सव पर अष्टप्रहर आरती होगी। लंदन में तैयार हुई ठाकुरजी की पोशाक धारण कराई जाएगी। रात 9 बजे से हरिनाम संकीर्तन के साथ बारह बजे तक ठाकुरजी का महाभिषेक होगा। इसके बाद महाआरती होगी। ब्रज के हर घर में कान्हा के जन्म का उत्सव मनाया जाएगा। यहां परंपरा है कि दिन भर व्रत रखकर मध्य रात्रि में खीरे का चीरा लगाकर शालिग्राम की बटिया के रूप में ठाकुर के जन्म की परंपरा निभाई जाती है। 
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