जानिए क्या है सोशल मीडिया हब, क्यों सरकार ने लिया यू-टर्न

नेशनल डेस्क: केंद्र सरकार ने सोशल मीडिया पर निगरानी के लिए सोशल मीडिया हब बनाने के फैसले से यू-टर्न ले लिया है। सरकार ने साफ कर दिया है कि वह अब सोशल मीडिया हब बनाने के प्रस्ताव वाली अपनी अधिसूचना को वापस ले रही है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि सोशल मीडिया हब क्या है और सरकार को क्यों अपने कदम पीछे खींचने पड़े।



क्या है सोशल मीडिया हब

  • सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने सोशल मीडिया हब बनाने का निर्णय लिया था।
  • सोशल मीडिया एक ऐसा माध्यम है जो सरकार की पकड़ में अब तक नहीं आ रहा था। जिसे देखते हुए सूचना और प्रसारण मंत्रालय के अंतर्गत आने वाले उपक्रम बेसिल ने 25 अप्रैल 2018 को एक टेंडर सोशल मीडिया कम्युनिकेशन हब नाम से जारी किया।
  • यह टेंडर सोशल मीडिया एनालिटेकल टूल के लिए था।
  • इस टूल के माध्यम से एजेंसी आपके द्वारा भेजी गई सभी ईमेल, उनके अटेचमेंट को पढ़ सकती थी। वह फेसबुक, ट्विटर, यूट्यूब, गूगल प्लस, इंस्टाग्राम, लिंक्डइन और प्ले स्टोर पर नजर रख सकती थी। 
  • इसमें प्रयोगकर्ता के प्रत्येक अकाउंट पर नजर रखना व्यक्ति के अतीत में किए गए कमेंट, लेखों, भेजी गई मेल का भी अध्ययन करना शामिल था। इसके जरिए उस व्यक्ति का पूर्ण प्रोफाइल तैयार किया जा सकता था। 
  • यह सरकार को बता सकता था कि अब कौन सी खबरें किस मीडिया में चल रही हैं। सरकार की किस योजना पर लोगों की क्या प्रतिक्रिया है। यह सरकार को यह सुझाव दे सकता था कि किस तरह की खबरें चलाने से या जानकारी देने से खबरों के इस प्रभाव (ट्रेंड) को बदला जा सकता है।


सरकार ने क्यों लिया यू टर्न 
सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद केंद्र सरकार सोशल मीडिया हब बनाने के फैसले से अपने हाथ खींच लिए हैं। इस साल 13 जुलाई की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि यह निगरानी राज बनाने जैसा है। सरकार सोशल मीडिया के संदेशों को टेप करना चाहती थी। इसके लिए सुप्रीम कोर्ट ने दो हफ्ते का समय दिया था। केंद्र ने शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट को सूचित किया था कि उसने सोशल मीडिया हब बनाने वाला टेंडर वापिस ले लिया है। मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा, जस्टिस ए एम खानविलकर और जस्टिस धनन्जय वाई चन्द्रचूड़ की तीन सदस्यीय पीठ  तृणमूल कांग्रेस की विधायक महुआ मोइत्रा की याचिका पर सुनवाई कर रही थी जिसमें आरोप लगाया गया था कि केंद्र की सोशल मीडिया हब नीति का नागरिकों की सोशल मीडिया गतिविधियों पर निगरानी रखने के हथियार के रूप में इस्तेमाल किया जाएगा। 


बीईसीआइएल ने जारी किया था टेंडर
25 अप्रैल 2018 को सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के अधीन आने वाली पीएसयू  ब्रॉडकास्ट इंजीनियरिंग कंसल्टेंट्स इंडिया लिमिटेड (बीईसीआईएल), मंत्रालय के तहत एक सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रम (पीएसयू) ने इस प्रोजेक्ट के लिए के लिए टेंडर जारी किया था। किसी भी कंपनी की रूचि न दिखने पर टेंडर की डेडलाइन तीन बार बढ़ाई गई। 

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