केरल बाढ़: अब 8वीं, 9वीं के बच्चे 10वीं के बच्चों के लिए तैयार कर रहे नोट्स

तिरुअनंतपुरम: केरल में पिछले महीने में आई बाढ़ ने लोगों के जीवन पर काफी प्रभाव डाला है, लेकिन इसके साथ स्टूडेंट्स को भी काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। असल समस्या उन बच्चों की है, जिनके 10वीं के एग्जाम हैं। बच्चों के नोट्स तो बाढ़ की वजह से खराब हो चुके हैं। अब इतने कम समय में सभी विषयों के पूरे नोट्स दोबारा तैयार करना और फिर उन्हें याद करना बेहद मुश्किल है। 


ऐसे में दूसरे जिलों के जूनियर छात्र तक उनकी मदद के लिए आगे आ गए हैं। राज्य के जो हिस्से बाढ़ से बच गए थे, वहां 8वीं, 9वीं तक के बच्चे 10वीं क्लास के नोट्स तैयार कर रहे हैं और इसे बाढ़ग्रस्त क्षेत्रों में भेज रहे हैं। ताकि वहां बच्चों को इन नोट्स से मदद मिल सके। तिरुअनंतपुरम की ईसाई संस्था लैटिन आर्चडायोसिस की तरफ से शुरू की गई इस पहल को अलग-अलग स्कूलों के 200 से ज्यादा बच्चों को जोड़ा गया है। ये बच्चे स्कूल में अपने पीरियड खत्म होने के बाद भी रुकते हैं। छुट्‌टी वाले दिन भी स्कूल आ रहे हैं। इस समय में वो 10वीं के अलग-अलग विषयों के नोट्स तैयार करते हैं। स्कूल के शिक्षक बच्चों को बोल-बोलकर ये नोट्स लिखवाते हैं। अभी तक जो नोट्स तैयार हुए हैं, उन्हें अलप्पुझा और कोच्चि भेजा जा रहा है। 

शिक्षक बताते हैं कि बच्चे तो बाढ़ग्रस्त क्षेत्रों में जाकर लोगों की मदद करना चाह रहे थे, लेकिन वो छोटे हैं इसलिए वहां जा तो नहीं सकते। लेकिन अब इस तरह से मदद करके बच्चों को भी अच्छा लग रहा है। आगे और भी नोट्स तैयार कर अलग-अलग बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में भेजने की कोशिश करेंगे। 

अगस्त में केरल में 100 साल की सबसे भीषण बाढ़ आई थी, इसके असर रह-रहकर सामने आ रहे हैं। बच्चे और शिक्षक खुशी-खुशी छुट्‌टी वाले दिन स्कूल आ रहे हैं। मुहिम से जुड़े फादर डायसन बताते हैं- "इस मुहिम से एक तरफ कुछ बच्चों की मदद हो रही है, वहीं दूसरी तरफ बाकी बच्चे मदद करना भी सीख रहे हैं। हम फोटोकॉपी कराकर भी नोट्स बांट सकते हैं, लेकिन कोशिश ये है कि बच्चों के अंदर मदद का भाव विकसित हो। बच्चे बाढ़ग्रस्त क्षेत्रों के हाल देखकर बहुत दुखी थे। सारे बच्चे और शिक्षक खुशी-खुशी छुट्‌टी वाले दिन भी स्कूल आ रहे हैं।' 
 

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