कारगिल दिवसः आज ही के दिन भारतीय सेना ने लिखी थी विजय गाथा, घुटने टेकने को मजबूर हुआ था PAK

नेशनल डेस्कः कारगिल युद्ध को आज पूरे 19 साल हो गए हैं। 26 जुलाई 2018 को कारगिल युद्ध समाप्त हुआ था और भारत ने दुश्मनों को घुटने टेकने के लिए मजबूर कर दिया था। कारगिल युद्ध भारत और पाकिस्तान के बीच 18 हजार फीट की ऊंचाई पर मई 1999 को शुरू हुआ था। इस सशस्र संघर्ष में भारत के 527 जवान वीरगति को प्राप्त हुए थे और 1300 से अधिक घायल हुए थे। वहीं पाकिस्तान का कहना है कि उसके करीब 357 सैनिक मारे गए थे जबकि हकीकत यह है कि इस युद्ध में पड़ोसी देश के 3 हजार से ज्यादा सैनिक मारे गए थे। 


1998 से ही युद्ध की शुरुआत
भले ही कारगिल का युद्ध 1999में शुरू हुआ हो लेकिन इसकी शुरुआत पाकिस्तान ने साल 1998 में ही कर दी थी। 1998 में उसने अपने करीब 5 हजार सैनिकों को कारगिल पर कब्जा करने के लिए भेज दिया था और पड़ोसी देश के सैनिकों ने कारगिल के एक हिस्से को घेर भी लिया था। भारत को जब इसकी भनक लगी तो पाक सैनिकों को खदेड़ने के लिए भारतीय सेना ने ऑपरेशन विजय शुरू किया। लेकिन बाद में इस मिशन कारगिल का नाम दिया गया।

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मिग-27 और मिग-29 का भी इस्तेमाल 
भारतीय थल सेना और वायु सेना ने मिलकर पाकिस्तानी सैनिकों को खदेड़ा।  पाक के खिलाफ भारतीय वायु सेना ने मिग-27 और मिग-29 का भी इस्तेमाल किया। इतना ही नहीं जहां भी पाकिस्तान ने कब्जा किया था सेना ने वहां बम गिराए। साथ ही मिग-29 की मदद से पाकिस्तान के कई ठिकानों पर आर-77 मिसाइलों से हमला किया गया। युद्ध में बड़ी संख्या में रॉकेट का इस्तेमाल किया गया। इस दौरान करीब दो लाख पचास हजार गोले दागे गए और 5,000 बम फायर करने के लिए 300 से ज्यादा मोर्टार, तोपों और रॉकेट का इस्तेमाल किया गया। युद्ध के दौरान हर रोज प्रति मिनट में एक राउंड फायर किया जाता था। बताया जाता है कि द्वितीय विश्व युद्ध के बाद कारगिल ऐसा युद्ध था जिसमें दुश्मन देश की सेना पर इतनी बड़ी संख्या में बमबारी की गई थी।

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युद्ध के परिणाम
14 जुलाई को तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने ऑपरेशन को सफल करार दिया था लेकिन आधिकारिक तौर पर इसे 26 जुलाई, 1999 को खत्म किया गया था। युद्ध से भारत में देशप्रेम का उबाल देखने को मिला। लोग सैनिकों के लिए दुआएं कर रहे थे। सहायता राशि तक भेजी गई। भारत की अर्थव्यवस्था को ज्यादा फर्क नहीं पड़ा। भारतीय सरकार ने रक्षा बजट और बढ़ाया जबकि पाकिस्तान में राजनैतिक और आर्थिक अस्थिरता बढ़ गई और नवाज़ शरीफ़ की सरकार को हटाकर परवेज़ मुशर्रफ़ राष्ट्रपति बन गए।

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वाजपेयी ने नवाज शरीफ से करवाई दिलीप कुमार की बात
पाक के पूर्व विदेश मंत्री खुर्शीद कसूरी ने अपनी किताब "नाइदर अ हॉक नॉर अ डव" में कारगिल युद्ध का जिक्र किया है। जिसमें उन्होंने बताया कि युद्ध के बीच एक दौर ऐसा भी आया जब वाजपेयी साहब ने शरीफ को फोन किया और बड़ी तल्ख आवाज में कहा कि हम तो आपके यहां लाहौर में दोस्‍ती का पैगाम लेकर आए थे लेकिन आपने तो बदले में हमको कारगिल युद्ध दिया। इसके बाद भारतीय पीएम ने फोन अभिनेता दिलीप कुमार को पकड़ा दिया। दिलीप कुमार ने तब शरीफ से कहा था, मियां साहब, आप हमेशा से ही दोनों मुल्‍कों के बीच अमन के बड़े पैरोकार रहे हैं, हमें आपसे ऐसी उम्‍मीद नहीं थी....।
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कारगिल युद्ध भारतीय सेना के साहस और ताकत का ऐसा उदाहरण है जिस पर हर हिन्दुस्तानी आज भी गर्व करता है।

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