कारगिल Special: वीर भूमि हिमाचल के 52 सूरमाओं ने दी थी शहादत

शिमला: भारत और पाकिस्तान के बीच मई से जुलाई, 1999 के दौरान 60 दिन तक हुए कारगिल युद्ध पर 26 जुलाई, 1999 को विराम लगा था। इस दिन को हर साल विजय दिवस के रूप में मनाया जाता है। 19 साल पहले इस सशस्र संघर्ष में भारत के 527 जवान वीरगति को प्राप्त हुए थे और 1363 के करीब जवान घायल हुए थे। हिमाचल से भी कारगिल युद्ध में 52 सपूत वीरगति को प्राप्त हुए थे। इस वीरभूमि के वीरों के साहस की गाथा का इतिहास साक्षी है। भारतीय सेना से मिलने वाला प्रत्येक 10वां मैडल हिमाचली रणबांकुरे के कंधे पर सजता है। जनसंख्या के आधार पर सर्वाधिक वीरता सम्मान इस प्रदेश के रणबांकुरों ने ही प्राप्त किए हैं।



सेवानिवृत्त ब्रिगेडियर खुशहाल ठाकुर 
मंडी जिला के नगवाईं निवासी कारगिल हीरो सेवानिवृत्त ब्रिगेडियर खुशहाल ठाकुर बताते हैं कि 22 मई 1999 को सबसे पहले तोलोलिंग चोटी पर चढ़ाई के आदेश मिले तो उन्होंने उसी दिन अपनी 18 ग्रेनेडियर्ज व 2 राजपूताना राइफल्ज के साथ चोटी की ओर कूच किया लेकिन दिन के वक्त शत्रु सेना के स्नाइपर गोलियां दागने लगे तो उन्हें रात के अंधेरे में चोटी पर चढ़ाई करनी पड़ी। कई दिन ताजा खाना नहीं मिला और बिना नहाए सैनिक दिन के उजाले में औट लेकर हथियारों को धार देते रहे और रात होते ही 17 हजार फुट की ऊंचाई वाली चोटी पर चढ़ते गए। 


कारगिल में टूट पड़े थे हिमाचली वीर
इतिहास में पहली बार किसी युद्ध में हिमाचली वीरों का सबसे ज्यादा रोल रहा था। दिल मांगे मोर का नारा देने वाले कैप्टन विक्रम बत्रा को मरणोपरांत व सैनिक संजय कुमार को परमवीर च्रक से नवाजा गया था। इस युद्ध में जिला कांगड़ा से 15, हमीरपुर से 7, बिलासपुर से 7, मंडी से 11, शिमला से 4, ऊना से 2, सोलन से 2, सिरमौर से 2 तथा चम्बा व कुल्लू से 1-1 सहित कुल 52 जवान शहीद हुए थे।


10 दिन बर्फ का पानी पीकर सकुशल लौटे थे लद्दाख स्काऊट के जवान
योल में रह रहे सेवानिवृत्त लैफ्टिनैंट जनरल के.एस. जम्वाल कारगिल युद्ध की याद ताजा करते हुए बताते हैं कि युद्ध के दौरान एक पहाड़ी को दुश्मन से छुड़वाने के दौरान लद्दाख स्काऊट्स के करीब 9-10 जवान भारी फायरिंग के बीच लापता हो गए। बचे हुए जवान वापस पोस्ट पर पहुंचे और वरिष्ठ अधिकारियों को इस घटना की जानकारी दी। तब यह मान लिया गया कि लापता सैनिक युद्ध में शहीद हो गए हैं लेकिन करीब 10 दिन बाद सभी जवान सकुशल अपनी पोस्ट पर लौट आए। इन जवानों ने बताया कि इन 10 दिनों में वे बर्फ का पानी पीकर जिंदा रहे और दुश्मन की फायरिंग से बचते हुए किसी तरह दुर्गम पहाड़ी से नीचे उतर कर पोस्ट तक पहुंचे।


देश सेवा के लिए ईमानदारी व सच्चाई जरूरी: परमवीर चक्र विजेता संजय 
जिला बिलासपुर के कलोल निवासी परमवीर चक्र विजेता संजय कुमार बताते हैं कि आज भी याद है, जब मसको वैली प्वांइट-4847 से हमारे ऊपर फायरिंग हो रही थी। उन्हें व उनके एक साथी को मसको वैली पर जाकर दुश्मनों से गन्ज छीनने का टास्क मिला था। लक्ष्य को भेदते हुए वह और उनका साथी फायरिंग के बिलकुल नजदीक पहुंचे और उनकी 2 गनें छीन लीं। उनका कहना है कि ईमानदारी व सच्चाई से जिस भी फील्ड में हम काम करें, वहीं सच्ची देश सेवा है।


स्मृति: कारगिल हीरो ब्रिगेडियर खुशहाल के मुख से
कारगिल युद्ध की अपनी स्मृतियों को ताजा करते हुए मंडी जिला के नगवाईं निवासी सेवानिवृत्त ब्रिगेडियर खुशहाल ठाकुर ने कहा कि कारगिल युद्ध विजय में भारतीय सेना के 18 गे्रनेडियर्ज का योगदान बेहद महत्वपूर्ण रहा। 18 गे्रनेडियर्ज ने इस युद्ध में न केवल अपने 2 जांबाज आफिसर्ज खोए बल्कि 34 सैनिक और 2 जे.सी.ओ. ने भी देश की खातिर प्राण न्यौछावर किए। यही नहीं, 18 ग्रेनेडियर्ज के 95 सैनिकों और आफिसर्ज के सीने गोलियों से छलनी हुए थे लेकिन बावजूद इसके 2 महत्वपूर्ण चोटियों तोलोलिंग व टाइगर हिल को फतह करने में 18 ग्रेनेडियर्ज कामयाब रही और कारगिल युद्ध जीत में सबसे ज्यादा योगदान दिया। खास बात यह रही कि इस पूरी प्लाटून की कमान तत्कालीन कर्नल के पास थी जो युद्ध में कमांडिंग आफिसर थे। 18 ग्रेनेडियर्ज को इस युद्ध में 52 गैलेंटरी अवार्ड मिले जो किसी भी युद्ध में सबसे ज्यादा पुरस्कार थे। 


युवा सोच है ‘एक ईंट, शहीद के नाम’
‘एक ईंट, शहीद के नाम’ महज एक अभियान ही नहीं है बल्कि एक युवा सोच भी है जिसके पीछे कुछ नया करने का जुनून और हौसला छिपा है। शुरूआत में अपनी सोच को लेकर अकेले निकले चंडीगढ़ के 36 वर्षीय संजीव राणा के साथ अब सैंकड़ों हाथ खड़े हैं जोकि उनके इस अभियान में हरसंभव मदद कर रहे हैं। बिलासपुर में ‘एक ईंट, शहीद के नाम’ अभियान उनकी सोच का ही नतीजा है जोकि अब साकार रूप ले चुका है। 36 हजार लोगों की टीम उनके साथ खड़ी है। 45 हजार से अधिक इंटें व अन्य सामग्री एकत्रित की जा चुकी है उनकी इस सोच को मूर्तरूप देने में बिलासपुर के युवा जिलाधीश विवेक भाटिया ने भी अपना पूरा सहयोग दिया है। 


संजीव राणा ने इससे पहले हरियाणा के करनाल व कुरूक्षेत्र में 2 शहीद स्मारक भी जनसहयोग से ही बनाए हैं, जहां से अब हिमाचल के हरेक जिला में शहीद स्मारक बनाने की युवा जिद्द व जोश है। उनका कहना है कि जब भी कोई शहीद होता था तो वह भी शहीद के परिवार के साथ मिलते थे, सहानुभूति जताते थे। ऐसा लगता था कि कोई औपचारिकता निभा रहे हैं। एक बार मन में विचार आया कि सरकारें शहीद परिवारों के लिए बहुत कुछ करती हैं लेकिन सहानुभूति जताने के बाद ऐसे परिवारों के लिए उन्होंने या समाज ने क्या किया। हमारी क्या जिम्मेदारी है। वहीं से उन्होंने शहीद स्मारक बनाने की ठानी, जिसमें सबका सहयोग लिया जाता है। 26 जुलाई को कारगिल दिवस पर स्वयं मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर बिलासपुर में भूमि पूजन कर इसके निर्माण का शुभारंभ करने जा रहे हैं। 


यह होगी शहीदों को सच्ची श्रद्धांजलि: शहीद विक्रम बतरा के पिता
शहीद विक्रम बत्रा के पिता गिरधारी लाल बतरा पहले ही कह चुके हैं कि शहीदों की शौर्य गाथा को पाठ्य पुस्तकों में शामिल किया जाना चाहिए ताकि युवा पीढ़ी इस से प्रेरणा ले सके। उनका यह भी कहना है कि देश की राजधानी में मुगल काल के कई शासकों के नाम पर सड़क मार्गों का नामकरण किया गया है इसी तर्ज पर शहीदों के नाम पर भी सड़क मार्गों का नामकरण किया जाना चाहिए। यह शहीदों के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।


नहीं बन पाया शहीद स्मारक
कारगिल युद्ध को बीते 19 साल हो गए हैं लेकिन शहीदों की याद में वीर भूमि हमीरपुर में अब तक शहीद स्मारक का निर्माण नहीं हो पाया है। इतना जरूर है कि राजनीतिक पार्टियां शहादत का जाम पीने वाले जवानों का राजनीतिकरण करने से पीछे नहीं रहती हैं। शहीदों के परिवारों व आम लोगों को इस बात का बहुत मलाल है। अणु के पास पक्का भरो में चिल्ड्रन पार्क के साथ में शहीद स्मारक बनाने की प्रपोजल भी है लेकिन उसे इतने साल बीत जाने पर भी राजनीतिक इच्छाशक्ति मूर्तरूप में नहीं पहुंच पाई है।


ऐसे लगा पाकिस्तान के षड्यंत्र का पता
कारगिल में घुसपैठ के पीछे पाकिस्तानी सेना का हाथ होने का पता तब लगा, जब लद्दाख स्काऊट्स के जवान 2 घुसपैठियों को मार गिराकर उनके शव वापस अपनी पोस्ट पर लाए। मारे गए घुसपैठिए पाकिस्तानी सेना की वर्दी में थे और उनसे मिले दस्तावेजों से पता चला कि वे पाकिस्तान की नॉर्दन लाइट इन्फैंट्री के थे। जैसा कि सेवानिवृत्त लैफ्टिनैंट जनरल के.एस. जम्वाल ने योल में बताया।


खतरों से खेलकर तोलोलिंग पहाड़ी पर पाई थी फतह
सेवानिवृत्त लैफ्टिनैंट जनरल के.एस. जम्वाल बताते हैं कि शुरूआत में यही सोचा कि दहशतगर्दों ने कारगिल क्षेत्र में घुसपैठ की है, जिस पर सबसे पहला काम सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण तोलोलिंग पहाड़ी को दुश्मन के कब्जे से छुड़वाना था जिसका जिम्मा राजपूताना राइफल्स और 18 ग्रेनेडियर सहित अन्य टुकड़ियों को सौंपा। तोलोलिंग पहाड़ी से समूचा श्रीनगर-लेह राजमार्ग दुश्मन की फायरिंग की जद्द में आ गया था। 22 मई, 1999 को सबसे पहले तोलोलिंग चोटी पर चढ़ाई के आदेश मिले। जवानों को कई दिन ताजा खाना नहीं मिला और बिना नहाए सैनिक दिन के उजाले में औट लेकर हथियारों को धार देते रहे और रात होते ही 15 से 17 हजार फुट की ऊंचाई वाली चोटी पर चढ़ते गए। घुसपैठ में पाकिस्तानी सेना का हाथ होने का पक्का सबूत मिलने के बाद रणनीति में बदलाव किया गया और बोफोर्स तोपों से दुश्मन के ठिकानों पर सीधे आर्टिलरी फायरिंग कर उनके हथियार और ईंधन भंडारों को नष्ट करना शुरू कर दिया, जिससे दुश्मन को खदेड़ने में काफी मदद मिली।


जिला कांगड़ा
1. परमवीर चक्र विजेता कैप्टन विक्रम बतरा
2. लैफ्टिनैंट सौरभ कालिया
3. ग्रेनेडियर बजिंद्र सिंह
4. राइफलमैन राकेश कुमार
5. लांस नायक वीर सिंह
6. राइफलमैन अशोक कुमार
7. राइफलमैन सुनील कुमार
8. सिपाही लखवीर सिंह
9. नायक ब्रह्म दास
10. राइफलमैन जगजीत सिंह
11. सिपाही संतोख सिंह
12. हवलदार सुरिंद्र सिंह
13. लांस नायक पदम सिंह
14. ग्रेनेडियर सुरजीत सिंह
15. ग्रेनेडियर योगिंद्र सिंह 


जिला हमीरपुर 
1. हवलदार कश्मीर सिंह वीर चक्र विजेता
2. हवलदार राजकुमार
3. सिपाही दिनेश कुमार
4. हवलदार स्वामी दास चंदेल
5. सिपाही राकेश कुमार
6. सिपाही सुनील कुमार
7. राइफलमैन दीप चंद


जिला बिलासपुर
1.  हवलदार उधम सिंह वीर चक्र विजेता
2. नायक मंगल सिंह
3. राइफलमैन विजय पाल
4. हवलदार राजकुमार
5. नायक अश्विनी कुमार
6. हवलदार प्यार सिंह, गांव खतेड़ घुमारवीं
7. नायक मस्त राम 


जिला मंडी
1. नायब सूबेदार खेम चंद राणा
2. हवलदार कृष्ण चंद
3. नायक सरवन कुमार
4. सिपाही टेक सिंह मस्ताना
5. सिपाही राकेश चौहान
6. सिपाही नरेश कुमार
7. सिपाही हीरा सिंह
8. ग्रेनेडियर पूर्ण चंद
9. लांस नायक गुरदास सिंह
10. नायक मेहर सिंह
11. लांस नायक अशोक कुमार


जिला शिमला
1. ग्रेनेडियर यशवंत सिंह
2. राइफलमैन श्याम सिंह वीर चक्र विजेता
3. ग्रेनेडियर नरेश कुमार
4. ग्रेनेडियर अनंत राम


जिला ऊना
1. कैप्टन अमोल कालिया वीर चक्र विजेता
2. राइफलमैन मनोहर लाल


जिला सोलन 
1. सिपाही धर्मेंद्र सिंह
2. राइफलमैन प्रदीप कुमार 


जिला सिरमौर
1. राइफलमैन कुलविंद्र सिंह
2. राइफलमैन कल्याण सिंह सेवा मैडल 


जिला चंबा
1. सिपाही खेम राज


जिला कुल्लू 
1. हवलदार डोला राम सेवा मैडल

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