ज्येष्ठ संकष्टी चतुर्थी: संकटों को हमेशा के लिए कहें Bye

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आज 22 मई को संकष्टी गणेश चतुर्थी व्रत है। हर महीने कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को ये व्रत किए जाने का विधान है। वर्तमान समय में ज्येष्ठ का महीना चल रहा है इसलिए इस महीने आने वाली गणेश चतुर्थी ज्येष्ठ संकष्टी गणेश चतुर्थी कहलाएगी। भविष्य पुराण में बताया गया है, जो व्यक्ति तन, मन, धन अथवा अन्य किसी भी कारण से परेशान हो उसे ये व्रत अवश्य करना चाहिए। इस व्रत के प्रभाव से हर तरह का संकट दूर होता है और धर्म, अर्थ, मोक्ष, ज्ञान, धन व स्वास्थ्य आदि मिलता है। 

शास्त्रों के अनुसार ज्येष्ठ मास की चौथ सौभाग्य देने वाली है। इस दिन गणेश जी के ‘मूषकरथ’ नामक रुप की पूजा करने का विधान है। शुद्ध घी से बनी वस्तुओं का भोग लगाएं।

बिगड़े काम बनाने के लिए गणेश चतुर्थी अथवा बुधवार को गणेश मंत्र का स्मरण करें- 
त्रयीमयायाखिलबुद्धिदात्रे बुद्धिप्रदीपाय सुराधिपाय।
नित्याय सत्याय च नित्यबुद्धि नित्यं निरीहाय नमोस्तु नित्यम्।

धन की कामना के लिए बुधवार अथवा गणेश चतुर्थी के दिन श्री गणेश को घी और गुड़ का भोग लगाएं। थोड़ी देर बाद घी व गुड़ गाय को खिला दें। ये उपाय करने से धन संबंधी समस्या का निदान हो जाता है।

घर के मुख्य दरवाजे पर गणेश जी की प्रतिमा लगाने से घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है। कोई भी नकारात्मक शक्ति घर में प्रवेश नहीं कर पाती। इसलिए घर के मुख्य द्वार पर गणेश जी की प्रतिमा लगानी चाहिए।

मान्यता है कि गणेश चतुर्थी के दिन गणपति जी के कानों में अपनी मनोकामना कहने से वह अवश्य पूरी होती है।


 

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