जेट एयरवेज के 200 कर्मचारियों ने उड्डयन मंत्रालय के बाहर किया प्रदर्शन

नई दिल्लीः आर्थिक रूप से संकटों का सामना कर रही जेट एयरवेज के कर्मचारियों ने मंगलवार को नागरिक उड्डयन मंत्रालय के बाहर प्रदर्शन किया। जेट के 200 कर्मचारी बैनर मंत्रालय की ओर बढ़ रहे थे लेकिन दिल्ली पुलिस और सीआरपीएफ ने उन्हें रोक दिया। बाद में तीन कर्मचारियों ने मंत्रालय के संयुक्त सचिव एस के मिश्रा से मुलाकात की।

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मीटिंग में शामिल कर्मचारी आशीष कुमार मोहंती ने कहा कि हमने ताजा हालात के बारे में बताया है। पिछले 5 महीने से हमें सैलरी नहीं मिली है। मेडिकल कवरेज भी रोक दिया गया है। हमने तीन प्रमुख मुद्दे- बकाया वेतन, जेट का कोई प्रबंधन नहीं होना और हिस्सेदारी बेचने के लिए एसबीआई की बिडिंग प्रक्रिया के बारे में जानकारी दी।

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आशीष के मुताबिक मिश्रा ने कहा है कि सरकार जेट एयरवेज का संचालन फिर से शुरू करने के लिए चिंतित है। उच्च अधिकारियों को इस बारे में पता है। पिछले 3-4 महीने से इस मुद्दे पर वार्ता और बैठकें चल रही हैं लेकिन कागजों पर अभी तक कुछ नहीं हुआ है। मिश्रा ने जेट के कर्मचारियों की बात अपने उच्च अधिकारियों तक पहुंचाने का भरोसा दिया है।

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जेट एयरवेज पर 8,000 करोड़ रुपए का कर्ज है। इमरजेंसी फंडिंग नहीं मिलने की वजह से जेट ने 17 अप्रैल को अस्थाई रूप से संचालन बंद कर दिया था। एयरलाइन के सीईओ विनय दुबे, सीएफओ अमित अग्रवाल, कंपनी सचिव कुलदीप शर्मा और चीफ पीपुल ऑफिसर राहुल तनेजा ने पिछले हफ्ते इस्तीफा दे दिया था।

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जेट के कर्जदाता 31.2 से 75 फीसदी तक हिस्सेदारी बेचने की कोशिश में जुटे हैं। 26 कर्जदाताओं की ओर से एसबीआई कैप्स ने 8 से 12 अप्रैल तक बोलियां मांगी थीं। शुरुआती चरण में 4 बोलियां मिली थीं। आखिरी बोली सिर्फ एतिहाद ने लगाई थी। एतिहाद ने बहुत कम हिस्सेदारी खरीदने का प्रस्ताव दिया। इसलिए जेट के फिर से शुरू होने की संभावनाएं काफी कम नजर आ रही हैं। 26 कर्जदाताओं के पास जेट के 51% शेयर हैं।

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