जन-धन खातों पर लटकी जांच की तलवार, नोटबंदी के बाद जमा हुए थे करोड़ों रुपए

नई दिल्लीः प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सबसे महत्वाकांक्षी योजनाओं में से एक जन-धन खातों पर भी अब जांच की तलवार लटक रही है। दरअसल 8 नवम्बर 2016 को हुए नोटबंदी के बाद करीब 60 फीसदी जन-धन खातों में संदिग्ध लेन-देन का मामला सामने आया है। 60 फीसदी यानी 3 करोड़ 70 लाख खातों में जांच की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है।

खातों की होगी जांच
वित्त सचिव हसमुख अधिया ने बताया कि इन खातों में धांधली को लेकर केन्द्रीय कर बोर्ड को विभिन्न बैंकों की 187 शाखाओं से 30 रिपोर्टें मिली हैं। उन्होंने कहा कि हालांकि प्रथम दृष्टि में इन डिपॉजिट्स को अवैध नहीं कहा जा सकता है, इस मामले में केन्द्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सी.बी.डी.टी.) द्वारा आवश्यक जांच के लिए सूचना प्राप्त की गई है। जांचकर्ता अब इन खातों में पैसे जमा करने वालों और खाताधारकों के नामों का मिलान कर रहे हैं। वित्त सचिव ने कहा कि जिन मामलों में जमा प्रोफाइल से मेल नहीं खाता है, उसकी आवश्यक जांच की जाएगी। इस मामले में जमाकर्ता की प्रतिक्रिया ली जाएगी और एकत्रित साक्ष्यों के आधार पर मूल्यांकन को अंतिम रूप दिया जाएगा। ऐसे मामलों में जांचकर्ताओं के निष्कर्षों को मान्य करने के बाद ही जमा को अवैध माना जा सकता है।

नोटबंदी के तुरंत बाद बड़ी मात्रा में जमा किए गए थे पैसे 
गौरतलब है कि 8 नवम्बर 2016 को नोटबंदी की घोषणा के एक दिन बाद जन-धन खातों में बड़ी मात्रा में पैसे जमा किए गए। सूत्रों के अनुसार नोटबंदी के एक दिन बाद 45,600 करोड़ रुपए जमा हुए थे। एक सप्ताह के भीतर इनमें जमा राशि 41 फीसदी बढ़कर 64,200 करोड़ रुपए हो गई थी। 7 दिसम्बर तक इन खातों में 74,600 करोड़ रुपए थे जो नोटबंदी के दिन से 63 फीसदी की वृद्धि दर्शाता है। हालांकि जमाकर्ताओं ने दिसम्बर 2016 के पहले सप्ताह से अपने खातों से पैसे निकालने शुरू कर दिए। मार्च 2017 के अंत तक इनमें जमा राशि 63,000 करोड़ रुपए हो गई। भारतीय रिजर्व बैंक ने 29 नवम्बर 2016 को जन-धन बैंक खातों से मासिक निकासी पर 10,000 रुपए की सीमा तय की थी।

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