जयराम सरकार ने आऊटसोर्स कर्मचारियों के लिए पॉलिसी बनाने से किया इंकार

शिमला (प्रीति):प्रदेश के 35,000 कर्मचारी इस बार भी पक्के नहीं हो पाएंगे। जयराम सरकार ने आऊटसोर्स कर्मचारियों के लिए पॉलिसी बनाने से इंकार कर दिया है। हालांकि भाजपा ने अपने चुनावी घोषणा पत्र में आऊटसोर्स कर्मचारियों के लिए पॉलिसी बनाने का वायदा किया था। अब जब भाजपा सरकार सत्ता में बैठी है तो सरकार ने इन कर्मचारियों के लिए स्थायी पॉलिसी बनाने से मना कर दिया है। ऐसे में उक्त कर्मचारियों में रोष है। इससे पूर्व भी कांगे्रस सरकार ने इन कर्मचारियों को कई प्रलोभन दिए। कांग्रेस ने भी कर्मचारियों का मुद्दा अपने घोषणा पत्र में शामिल किया और कर्मचारियों को आश्वासन दिया कि सत्ता में आते ही उनके लिए स्थायी नीति लाई जाएगी तथा उनका भविष्य सुरक्षित किया जाएगा लेकिन सत्ता में आते ही पूर्व कांग्रेस सरकार ने इस मामले को नजरअंदाज किया और 5 साल तक कर्मियों को कोई राहत नहीं दी।

इन 2 दशकों में सरकारों ने आऊटसोर्स कर्मचारियों को स्थायी पॉलिसी के लॉलीपॉप दिए लेकिन आज तक कोई भी सरकार इनके लिए पॉलिसी नहीं ला पाई। ऐसे में ये कर्मचारी पिछले 20 सालों से आऊटसोर्स का दंश झेल रहे हैं। कर्मचारियों का आरोप है कि राजनीतिक पार्टियां पहले सहयोग मांगती हैं और जब सत्ता में आती हैं तो फिर बहाने बनाने शुरू कर दिए जाते हैं तथा कानूनी पाठ पढ़ाए जाते हैं। पूर्व कांग्रेस सरकार द्वारा की गई वायदाखिलाफी के बाद कर्मचारियों ने भाजपा को इस उम्मीद के साथ सहयोग दिया था कि सत्ता में आने के बाद भाजपा सरकार उन्हें सरकारी विभागों में समायोजित करेगी या उनके लिए कोई राहत भरी पॉलिसी लाएगी लेकिन भाजपा सरकार ने भी आऊटसोर्स कर्मचारियों को धोखा दिया है। इस समय प्रदेश में 35,000 कर्मचारी कंपनी के माध्यम से सरकारी कार्यालयों में कार्य कर रहे हैं। 

चुनाव बहिष्कार का बनाया मन

सरकारों की ऐसी बेरुखी पर आऊटसोर्स कर्मचारियों ने लोकसभा चुनाव का बहिष्कार करने का फैसला लिया है। कर्मचारियों का कहना है कि दोनों सरकारों ने आऊटसोर्स कर्मचारियों के साथ वायदाखिलाफी की है। ऐसे में इस बार कर्मी इन चुनावों में भाग नहीं लेंगे। लोकसभा चुनाव के बाद आगे आने वाले विधानसभा चुनाव का भी कर्मचारी बहिष्कार करेंगे।

कंपनियों को फायदा दे रही सरकारें

प्रदेश में आऊटसोर्स पॉलिसी लाकर सरकारें कर्मचारियों का शोषण कर रही हैं और कंपनी को फायदा दे रही हैं। इस समय प्रदेश में दर्जनों ऐसी कंपनियां हैं जो विभागों में आऊटसोर्स कर्मचारी उपलब्ध करवा रही हैं। प्रदेश में यह सिलसिला बीते 20 वर्षों से जारी है। डाटा एंट्री आप्रेटर्ज से लेकर स्कूलों में शिक्षक सहित कई बड़े ओहदों पर इन कंपनियों के माध्यम से कर्मचारियों को तैनाती दी जा रही है। इससे कंपनियों को अच्छा मुनाफा हो रहा है जबकि कर्मचारियों को इससे नुक्सान हो रहा है।

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