भारत का प्रदूषण को कम करने के लिए 88.5K करोड़ की प्रोत्साहन राशि देने का प्रस्ताव

नई दिल्ली: भारत सरकार प्रदूषण को कम करने के लिए उद्योगों को प्रोत्साहित कर रही है। भारत सरकार ने विद्युत प्लांट्स को बढ़ावा देने के लिए 885 विलियन रुपए 12.4 विलियन डॉलर की प्रस्तावित प्रोत्साहन राशि रखी है ताकि इलेक्ट्रॉनिक वाहन के लिए ढांचा विकसित किया जा सके और प्रदूषण को रोकने के लिए उपकरण लगाए जा सके। सरकारी बयान में कहा गया कि इस धनराशि में से अधिकांश 835 विलियन रुपए विद्युत प्लांटो से निकलने वाले सल्फर पर अंकुश लगाने के लिए खर्च किया जाएगा। जबकि शेष 2025 को खत्म होने वाले 5 वर्षों में 70 शहरों में (EV) इलैक्ट्रिक वाहन आधारभूत ढांचा विकसित करने पर खर्च किया जाएगा। 

विद्युत मंत्रालय द्वारा दिए गए वित्त आयोग को ये प्रस्ताव मौजूदा प्रस्तावों के अतिरिक्त है। जिसके तहत प्रदूषण को रोकने के लिए उपकरण लगाने के लिए प्रावधान होगा। मंत्रालय की ये योजना वित्तीय संकट के तहत इस क्षेत्र की पृष्ठभूमि के मध्यनजर आया है। जिसके तहत अधिकांश राज्यों द्वारा संचालित वित्तीय संस्थाओं से लोन लिया जाएगा। ये बात एसोचेम ग्रांट प्रॉटन की इस महीने की रिपोर्ट में दी गयी। बिजली पैदा करने वाले एशोसिएशन पिछले दो वर्षों से लॉबिंग कर रही थी। एशोशिएशन एक औद्योगिक ग्रुप है जिसमे रिलायंस पॉवर,अड़ानी पॉवर जैसी प्राइवेट कंपनियों के साथ-साथ राज्य संचालित एनटीपीसी प्रतिनिधित्व करती हैं। 

भारत ने 6 वर्ष तक प्रदूषण निकासी स्टेन्डर्ड को पूरा करने के लिए दिसबंर 2017 तक समय सीमा पहले ही बढ़ाई है क्योंकि बिजली उत्पादक कंपनियां 2015 में पर्यावरण मंत्रालय द्वारा स्थापित किए गए सख्त नियमों से संघर्षरत थी। प्रदूषण कम करने के लिए इसलिए जोर दिया जा रहा है क्योंकि इससे फेफड़ों की बीमारी, तेजाबी वर्षा और धुंध की समस्या पैदा होती है। थर्मल पॉवर कंपनियां सभी औद्योगिक प्रदूषण के मुकाबले 80 प्रतिशत तक जिम्मेवार हैं। इसी बीच EV वाहन को प्रोत्साहन इसलिए दिया जा रहा है ताकि इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा दिया जाए और कहा गया कि 2030 तक सभी नए वाहन विजली चालित होंगे। 

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