नजरिया: LOC पर ढोल

नेशनल डेस्क (संजीव शर्मा):  भारत -पाक के बीच स्थित 740  किलोमीटर लम्बी  एलओसी पर आजकल ढोल बज रहा है।  खासकर पुंछ  इलाके में। आम तौर पर यहां गोलियों की आवाज और  बमों के धमाके गूंजते हैं। ऐसे में अगर यहां ढोल की थाप  गूँज रही है तो  चौंकने वाली बात तो है ही। दरअसल बरसों बाद यह पहली बार है जब सीमा पर बंदूकों की ख़ामोशी के चलते पुंछ के सीमावर्ती गांवों में धान की फसल बीजने को समय मिला है। करीब एक सप्ताह से सीमा पार से पाकिस्तानी सेना की फायरिंग नहीं हुई है. ऐसे में  पूरा इलाका  जोर-शोर से धान की रोपाई में जुट गया है। बरसों बाद किसानो को  धान बीजने का मौका मिला है तो इस खुशी में ढोल भी बज रहा है। गांव के बुज़ुर्ग असगर अली याद करके बताते हैं कि ऐसा करीब दो दशक बाद हो रहा है। वो ज़माना था जब धान की रोपाई होती ही ढोल -धमाके के साथ थी। बाद में सीमा पर हालात खराब होते गए और  पिछले कुछ साल से खेतों में जाना तो दूर  लोग घरों में रहने को भी तरस  गए थे।
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पाकिस्तानी गोलीबारी के कारण अक्सर गांव खाली करके शरणार्थी शिविरों में रहना पड़ता था।  लेकिन अब यकायक  उसपार खामोशी छा गई है। ऐसे में जब लोगों को समय मिला तो वे उमड़ पड़े खेतों में धान बीजने। गांव के ही  फैज़ल हुसैन बताते हैं कि यह सच में किसी उत्सव से कम नहीं है। उनके मुताबिक जिस तरह से भारतीय फ़ौज ने  पिछले कुछ समय से पाक सेना को फायरिंग का मुंहतोड़ जवाब दिया है , यह उसी का नतीजा है कि  बरसों बाद  फसल बीजने के समय शांति वाला माहौल मिला है।   पुंछ  की फ़िज़ाओं में  गूंजती ढोल की यह आवाज दरअसल कई संभावनाओं को संजीवनी देती है। इस माहौल से लोगों का  विश्वास फिर से लौटेगा। इससे एक बात तो तय हो जाती है कि भारतीय फ़ौज  सीमा पर  पाकिस्तान  के साथ  सख्ती बरतने में सफल रही है। 
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 खासकर जबसे जम्मू-कश्मीर में सरकार अपदस्थ हुई है सेना ने अपना फोकस ज्यादा स्पष्ट कर किया है। थलसेनाध्यक्ष बिपिन रावत श्रीनगर में ही डेरा डाले  हुए हैं और घाटी के भीतर  आतंकरोधी अभियानों पर कड़ी नज़र रखे हुए हैं। एक हफ्ते के भीतर सेना ने दस टॉप आतंकी मार गिराए हैं और दो को जिन्दा पकड़ा गया है। एलओसी पर एक महीने में तीन बार पाकिस्तानी सेना फ्लैग मीटिंग का आग्रह कर चुकी है।  यह दर्शाता है कि खुद को हो रहे  नुक्सान से पाकिस्तानी सेना परेशान है। हालांकि अभी यह कहना तो मुश्किल है कि यह माहौल कब तक शांत  रहेगा ,लेकिन फिलवक्त एलओसी की शांति समारोह का सबब जरूर बनी है। इंशाअल्लाह यह माहौल लम्बा चले।  
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