''भारत शुल्क लगाने में आगे नहीं, WTO के तहत विशिष्ट क्षेत्रों के संरक्षण का अधिकार''

नई दिल्लीः अंतरराष्ट्रीय व्यापार विशेषज्ञों ने कहा है कि भारत ‘शुल्क लगाने के मामले में राजा' नहीं है और उसके पास कृषि जैसे क्षेत्रों के हितों के संरक्षण के लिए उचित कदम उठाने के पूरे अधिकार हैं। विशेषज्ञों ने अमेरिका के उन आरोपों को खारिज किया है कि भारत सामानों के आयात पर सर्वाधिक शुल्क लगाता है। उन्होंने कहा कि जापान, दक्षिण कोरिया, यूरोपीय संघ और अमेरिका सहित कई विकसित देश और क्षेत्र प्रमुख रूप से कृषि उत्पादों पर 'बहुत अधिक' शुल्क लगाते हैं। 

उल्लेखनीय है कि अमेरिका के राष्ट्रपति कई मौकों पर भारत को 'शुल्क लगाने के मामले में राजा' करार दे चुके हैं। उनके मुताबिक 'अमेरिकी उत्पादों' पर बहुत अधिक शुल्क लगाता है। जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में अर्थशास्त्र के प्रोफेसर विश्वजीत धर ने कहा कि अमेरिका के आरोप पूरी तरह बेबुनियाद हैं। धर ने कहा, ''वास्तव में कई उत्पादों पर अमेरिका के आयात शुल्क बहुत अधिक हैं, जैसे कि वह तंबाकू पर 350 प्रतिशत और मूंगफली पर 164 प्रतिशत शुल्क लेता है। वे भी बहुत अधिक शुल्क लेते हैं।'' 

भारतीय विदेश व्यापार संस्थान (आईआईएफटी) के प्रोफेसर राकेश मोहन जोशी ने भी कुछ इसी प्रकार की राय प्रकट की। उन्होंने कहा कि अमेरिका के आरोप सही नहीं है और वास्तव में एक विकसित देश होने के नाते उसे अपने कर ढांचे को अधिक युक्तिसंगत बनाना चाहिए। भारतीय व्यापार संवर्धन परिषद के चेयरमैन मोहित सिंगला ने कहा कि अमेरिका का वक्तव्य सही नहीं है। उन्होंने कहा, ''अन्य देशों की तरह भारत के पास भी अपने घरेलू हितों के संरक्षण के लिए उचित कदम उठाने का अधिकार है। कई ऐसे देश हैं, जहां भारत की तुलना में शुल्क अधिक है। डब्ल्यूटीओ का सदस्य होने के नाते भारत स्वतंत्र, निष्पक्ष और भरोसेमंद व्यापार के लिए प्रतिबद्ध है।'' 

विश्व व्यापार संगठन 164 देशों का एक समूह है जो वैश्विक व्यापार के नियम तय करता है। सिंगला ने कहा कि जापान कुछ उत्पादों पर 736 प्रतिशत तक कर लेता है जबकि कोरिया कुछ उत्पादों पर 807 फीसदी तक शुल्क वसूलता है। भारतीय निर्यातकों के संगठन के परिसंघ (फियो) ने कहा कि अल्कोहल पेय पर 150 प्रतिशत, कॉफी पर 100 फीसदी और वाहन क्षेत्र पर 60-75 के कर के कारण अमेरिका के राष्ट्रपति की नजर में भारत की छवि अधिक शुल्क लगाने वाले देश के रूप में बन गई है। फियो के महानिदेशक अजय सहाय ने कहा कि जापान, दक्षिण कोरिया, यूरोपीय संघ और अमेरिका विभिन्न उत्पादों खासकर कृषि उत्पादों पर बहुत अधिक शुल्क लेते हैं।

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