मिडिल स्कूलों में अब हिंदी और पंजाबी पढ़ाएगा एक ही अध्यापक

लुधियानाःशिक्षा विभाग द्वारा बनाई गई रेशनेलाइजेशन पॉलिसी में विभाग ने क्वालिटी एजुकेशन देने के बजाए भाषाओं को ही बिगाड़ने का रुख अख्तियार कर लिया है। शिक्षा विभाग द्वारा हाल ही में फाइनल रेशनेलाइजेशन पॉलिसी डिक्लेयर की गई है। इसमें मिडिल स्कूलों में तीन सेक्शन तक 8 अध्यापकों के बजाए सिर्फ 4 ही अध्यापकों को रखने के आदेश दिए हैं। यही नहीं हिंदी और पंजाबी दोनों भाषाओं के साथ खिलवाड़ करते हुए दो महत्वपूर्ण भाषाओं के अध्यापकों में से सिर्फ एक ही अध्यापक को स्कूल में रखने का निर्णय किया गया है। 

 

शिक्षा विभाग के इस निर्णय से न सिर्फ स्कूलों में बल्कि साहित्य जगत में भी रोष देखने को मिल रहा है। स्पोर्ट्स के टीचर्स को स्टूडेंट्स की क्रिएटिविटी और आर्ट को भी बढ़ाना होगा। राज्य में 2671 मिडिल स्कूल हैं। इसमें 1,44,979 स्टूडेंट्स पढ़ाई कर रहे हैं। 

 

शिक्षा विभाग के निर्णय से अध्यापकों और साहित्य जगत में रोष

कहा जा रहा है कि पीटीआई और आर्ट एंड क्राफ्ट में से एक टीचर को सीनियर सैकेंडरी स्कूल में शिफ्ट  किया जाएगा। स्कूलों को बीए (मैथ) और बीएससी (मेडिकल) योग्यता वाले टीचर रखने की अनुमति नहीं होगी। स्टूडेंट्स ज्यादा होने पर एसएसटी का अध्यापक होने पर इंग्लिश की पोस्ट मिलेगी। अगर साइंस नॉन मैडीकल की पोस्ट है तो उसकी जगह साइंस मैडीकल और मैथ की पोस्ट मिलेगी। जिन मिडिल स्कूलों में साइंस मैडीकल और मैथ की पोस्ट होने के बाद भी स्टूडेंट्स की गिनती ज्यादा होगी वहां अगली पोस्ट मिलेगी। पीटीआई और आर्ट एंड क्राफ्ट टीचर में से एक अध्यापक को नजदीकी सीनियर सैकेंडरी स्कूल में शिफ्ट किया जाएगा। 

हर भाषा की अपनी व्याकरण है। हिंदी का अध्यापक कैसे पंजाबी पढ़ाएगा और पंजाबी का अध्यापक हिंदी कैसे पढ़ा पाएगा। ये दोनों भाषाओं के साथ अन्याय है। बीएससी (मैडीकल) अध्यापक को मैथ पढ़ाने को कहा जाता है। अगर हमें स्टूडेंट्स का भविष्य बनाना है तो हमें अध्यापक भी एक्सपर्ट ही रखने होंगे।                      -डॉ. गुरचरण कौर कोचर, वरिष्ठ साहित्यकार 

जिस विशेषज्ञता से भाषा का माहिर पढ़ाएगा वो दूसरी भाषा का माहिर नहीं पढ़ा सकेगा। हिंदी या पंजाबी भाषा पढ़ाने वाले अध्यापक ने 10वीं के बाद दूसरी भाषा नहीं पढ़ी। ऐसे में वो भाषा से न्याय नहीं कर पाएगा। ये तकनीकी तौर पर सही नहीं है। 

                                                            - डॉ. परमजीत सिंह कलसी, प्रेसिडेंट, ऑल इंडिया स्टेट एंड नेशनल अवार्डी टीचर्स एसोसिएशन 

 

पॉलिसी में पोस्टें बढ़ाने के जिक्र में हिंदी और पंजाबी की पोस्ट बढ़ाने की जानकारी नहीं दी गई है। उन्होंने कहा कि हमारी यही मांग है कि हिंदी और पंजाबी की पोस्टें स्कूलों में रखी जाएं।              -मनोज कुमार, जनरल सेक्रेटरी, हिंदी शिक्षक संघ 

 

विभाग द्वारा कॉस्ट कटिंग के लिए ये तरीका अपनाया जा रहा है। मिडिल स्कूल में चार पोस्टें रखने पर अध्यापक सरप्लस होंगे जिन्हें अन्य स्कूलों में शिफ्ट कर दिया जाएगा। ये शिक्षा के आधार के साथ खिलवाड़ है। जिसे विभाग को ध्यान में जरूर रखना चाहिए। विभाग क्वालिटी एजुकेशन पर जोर दे।                                               ' अनूप पासी, पूर्व प्रिंसीपल 
 

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