ऑफ द रिकॉर्डः अशोक चावला के मामले में सरकार के हाथ बंधे

नेशनल डेस्कः नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एन.एस.सी.) के मौजूदा चेयरमैन और सशक्तपूर्व नौकरशाह अशोक चावला के मुद्दे पर मोदी सरकार के हाथ बंधे हुए हैं। सी.बी.आई. ने एयरसैल-मैक्सिस मामले में विदेशी निवेश प्रोत्साहन बोर्ड (एफ.आई.पी.बी.) के चेयरमैन के रूप में उनकी संदिग्ध भूमिका के लिए उनके खिलाफ पहले ही आरोप पत्र दायर किया हुआ है। वह तत्कालीन वित्त मंत्री पी. चिदम्बरम के तहत वित्त सचिव थे और प्रावधानों का उल्लंघन कर कथित रूप से एयरसैल-मैक्सिस समझौते को मंजूरी दी थी। हैरानगी की बात यह है कि चावला को मोदी सरकार ने पिछले वर्ष एन.एस.ई. का चेयरमैन उस समय नियुक्त किया था जब वह सी.सी.आई. के चेयरमैन के पद से सेवानिवृत्त हुए थे।

सी.बी.आई. ने अब उनके खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया है। कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग (डी.ओ.पी.टी.) ने सी.बी.आई. को चावला और अन्य पूर्व नौकरशाहों के खिलाफ इस मामले में मुकद्दमा चलाने की अनुमति नहीं दी। वित्त मंत्री पीयूष गोयल ने इस संबंध में अपनी अज्ञानता व्यक्त की और डी.ओ.पी.टी. के प्रभारी मंत्री जितेन्द्र सिंह ने इस संबंध में टिप्पणी करने से इंकार कर दिया। इस मामले में रहस्य उस समय गहरा गया जब राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद अंतिम क्षणों में बुधवार को दिल्ली में एन.एस.ई. के समारोह से बाहर हो गए।

एन.एस.ई. राजधानी में अपना रजत जुबली समारोह मना रही थी और कोविंद के फैसले से सबको आघात लगा। इससे संकेत मिलता है कि अशोक चावला के लिए सब बेहतर नहीं और सरकार शीघ्र ही उसके खिलाफ मुकद्दमा चलाने की अनुमति दे सकती है। संशोधित भ्रष्टाचार निरोधक एक्ट (सी.सी.ए.) के तहत किसी मामले में सरकार की यह पहली अनुमति होगी।

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