1970 में भी सजा था जुलाना में जींद जैसा दंगल

जींद (जसमेर मलिक): जींद में 28 जनवरी को हो रहे उपचुनाव को लेकर जिस तरह का सियासी दंगल इन दिनों जमा है और पूरे प्रदेश के तमाम दलों के दिग्गज जींद में डेरा डाले हुए हैं, ठीक इसी तरह का सियासी दंगल 1970 में जुलाना में जमा था। 1970 के जुलाना के उस सियासी दंगल की याद अब जींद उपचुनाव को लेकर सजे दंगल ने ताजा करवा दी है। इस समय जींद प्रदेश की सियासी राजधानी बना हुआ है।

चंडीगढ़ में हरियाणा सिविल सचिवालय सूना है और पूरी प्रदेश सरकार जींद में कैंप किए हुए है। सरकार के तमाम मंत्रियों से लेकर चेयरमैन व दूसरे नेता जींद से भाजपा उम्मीदवार की चुनावी नैया पार लगाने के लिए कई दिन से जींद शहर और जींद हलके के गांवों की खाक छान रहे हैं। एक तरह से प्रदेश की सरकार जींद से चल रही है। जरूरी सरकारी फाइलें इस समय जींद से ही निकलवाई जा रही हैं। अन्य दलों के भी छोटे से लेकर बड़े तमाम नेता जींद में डेरा डाले हुए हैं। सभी राजनीतिक दलों के मुख्यालय एक तरह से अस्थायी रूप से ही सही, इन दिनों जींद में बन गए हैं। यहीं से सभी दलों की सियासत इन दिनों संचालित हो रही है। 

1970 में ठीक ऐसा ही सियासी दंगल जुलाना में जमा था, जैसा इन दिनों जींद में जमा हुआ है। तब जुलाना उपचुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार फतेह सिंह और कांग्रेस-ओ के उम्मीदवार पूर्व मंत्री चौधरी दल सिंह थे। चौधरी दल सिंह के लिए तब बिहार के बड़े नेता कर्पूरी ठाकुर, सत्यनारायण सिन्हा, तारकेश्वरी सिन्हा, चौधरी चांद राम, मनी राम बागड़ी, भगवत दयाल शर्मा आदि ने चुनाव प्रचार किया था।

उस समय पूरा विपक्ष जुलाना में डेरा डाले बैठा था। तब प्रदेश में बंसीलाल के नेतृत्व में कांग्रेस की सरकार थी और कांग्रेस प्रत्याशी फतेह सिंह को जितवाने के लिए तत्कालीन सी.एम. बंसीलाल से लेकर उनकी सरकार के तमाम मंत्री ठीक उसी तरह जींद में डेरा डाले बैठे थे, जिस तरह इन दिनों जींद उपचुनाव में सी.एम. मनोहर लाल व उनका पूरा मंत्रिमंडल डेरा डालकर बैठा है। जुलाना के उस उपचुनाव में कांग्रेस की लगभग 5500 मतों के अंतर से हार हुई थी। 

1970 के चुनाव के प्रत्यक्षदर्शी रहे परमेंद्र ढुल बताते हैं कि वह दौर सोशल मीडिया और मीडिया का नहीं था। तब वोट मांगने के लिए एक-एक मतदाता से संपर्क करना पड़ता था। 1970 के जुलाना और 2019 के जींद उपचुनाव में समानता यह है कि तब भी जुलाना पूरे प्रदेश की सियासत का सबसे बड़ा केंद्र बना था और अब जींद इसी तरह प्रदेश की सियासत का सबसे बड़ा केंद्र बन गया है। 
 

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