मॉडल टाउन में अवैध कब्जों पर कार्रवाई से भड़के लोग,इम्प्रूवमैंट ट्रस्ट टीम पर बरसाए पत्थर

जालंधर(सोनू,पुनीत): माडल टाऊन से सटे लतीफपुरा में कब्जे हटाने गई इम्प्रूवमैंट ट्रस्ट की टीम को आज फिर बैरंग लौटना पड़ा।  इस फ्लॉप शो का कारण इम्प्रूवमैंट ट्रस्ट, प्रशासन व पुलिस में तालमेल का अभाव कहा जा सकता है क्योंकि समय रहते कार्रवाई शुरू नहीं हो पाई। इम्प्रूवमैंट ट्रस्ट द्वारा जो योजना बनाई गई थी उसके मुताबिक सुबह 7 बजे के करीब कार्रवाई शुरू की जानी थी लेकिन उक्त कार्रवाई 10 बजे के बाद शुरू हो पाई, जिसके चलते लोगों को अपने समर्थक इकट्ठे करने का मौका मिल गया।

योजना के मुताबिक ट्रस्ट कर्मचारी सुबह साढ़े 7 बजे से पहले मॉडल टाऊन पहुंच गए और अगले आदेशों का इंतजार करते रहे, टीम ने पुलिस के साथ मौके पर जाना था और प्रशासन की ओर से तैनात किए गए ड्यूटी मैजिस्ट्रेट की मौजूदगी में कार्रवाई शुरू होनी थी लेकिन पुलिस व अधिकारी 10 बजे के करीब मौके के लिए रवाना हुए। इससे पहले सुबह 7 बजे के करीब ट्रस्ट के चेयरमैन दीपर्व लाकड़ा, ई.ओ. सुरेन्द्र कुमारी सहित ट्रस्ट के कर्मचारियों की मीटिंग हुई जिसमें आवश्यक हिदायतें जारी की गईं। इसके बाद अधिकारी डी.सी. के साथ मीटिंग करने के लिए निकल गए, जहां इलाका पार्षद अरुणा अरोड़ा, मनोज अरोड़ा सहित कुछ इलाका निवासी भी मौजूद थे।

उक्त मीटिंग काफी समय तक चली और मीटिंग के खत्म होने के उपरांत चेयरमैन दीपर्व लाकड़ा पौने 10 बजे के करीब माडल टाऊन पहुंचे। ट्रस्ट ने पुलिस के घेरे में एनाऊंसमैंट शुरू की और लोगों को कब्जे खाली करने हेतु कहा। ट्रस्ट ने अपने हिस्से की जमीन पर निशान लगाने शुरू कर दिए। इस दौरान डिच मशीनें मुख्य सड़क पर स्थित एक दीवार को तोडऩे लगीं जिससे लोगों का गुस्सा भड़क गया और उन्होंने ट्रस्ट की टीम पर पथराव शुरू कर दिया।इस दौरान 200 पुलिस मुलाजिमों की मौजूदगी में 14-15 लोगों ने पथराव करके ट्रस्ट की टीम को भगा दिया। इस दौरान डिच मशीनें तेज रफ्तार में बैकजाने लगीं। लोगों ने डिचों पर पथराव करते हुए उनके शीशे तोड़ दिए। इस दौरान डिच पर सवार चालक को भी चोटें आईं। पुलिस के मोर्चा संभालने के बाद पत्थरबाजी बंद हुई। इस उपरांत लोगों ने सड़क पर टायर फूंक कर लंबे समय के दौरान प्रदर्शन किया। 
 

लोगों ने कहा-जान दे देंगे पर जाएंगे नहीं
लोगों ने ट्रस्ट द्वारा की जाने वाली कार्रवाई को गलत करार देते हुए कहा कि वह अपनी जान दे देंगे लेकिन अपने घरों को छोड़कर नहीं जाएंगे। उन्होंने कहा कि वह 70 सालों से यहां बसे हैं और सरकार उन्हें बेघर करना चाहती है लेकिन ऐसा किसी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। लोगों की वोटें बनी हैं, पक्के मीटर लगे हैं, यदि गलत होता तो उनके आई.डी. प्रूफ इत्यादि कैसे बन पाते।  

प्रशासन द्वारा खर्च किए लाखों रुपए गए व्यर्थ
कब्जे हटाने के लिए ट्रस्ट द्वारा लाखों रुपए खर्च किए गए लेकिन वह व्यर्थ साबित हो गए क्योंकि ट्रस्ट कब्जे नहीं हटा पाया। इस दौरान फोटोग्राफी व वीडियोग्राफी करवाने के लिए बड़े स्तर पर खर्च करवाया गया। सैंकड़ों कर्मचारियों की ड्यूटियां लगाई गई हैं जिनकी सैलरी को जोड़ा जाए तो वह लाखों रुपए बनते हैं। वहीं पुलिस की दर्जनों गाडिय़ां, 3 के करीब फायर ब्रिगेड की गाडिय़ां, कर्मचारियों को लाने के लिए इस्तेमाल की गई बसें, घटनाक्रम को रिकार्ड करने वाली पुलिस की गाड़ी, डिच मशीनें, मलबा हटाने के लिए लाई गई लेबर सहित कई तरह के खर्च हुए। 

विरोध कर रही कई महिलाएं हुई बेहोश 
वहीं इस दौरान विरोध करने वाली कई महिलाएं बेहोश हो गईं जिन्हें काफी समय के बाद होश आया। कई महिलाएं विरोध करते हुए जमीन पर लेट गईं और कहा कि उनके ऊपर डिच चलाओ। इस दौरान एक महिला की हालत काफी बिगड़ गई जिसे उठाकर लोग डाक्टर के पास लेकर गए और दवा इत्यादि करवाई। इससे पहले भी कई बार कब्जे हटाने गई टीम का विरोध हुआ है और हर बार टीमें खाली हाथ वापस आती रही हैं। 

हैल्मेट ने किया ट्रस्ट अधिकारियों का बचाव
किसी भी तरह की आपात स्थिति से बचने के लिए ट्रस्ट अधिकारी व कर्मचारी हैल्मेट पहनकर आए थे, सभी कर्मचारियों को हिदायतें दी गई थीं कि स्पोर्ट्स शूज का ही इस्तेमाल किया जाए। पत्थरबाजी के दौरान ट्रस्ट के एक कर्मचारी को बड़ा पत्थर लगा जिससे उसका हैल्मेट टूट गया, यदि हैल्मेट न होता तो काफी चोट आ सकती थी। उक्त कर्मचारी की बाजू पर भी चोट आई। इस दौरान एक महिला सहित कुल 2 कर्मचारियों को चोटें आईं जिसमें एक क्रेन चालक भी शामिल है। 

हैल्मेट ने किया ट्रस्ट अधिकारियों का बचाव
 ट्रस्ट की टीम के हाथ भले ही निराशा लगी है लेकिन अधिकारी कब्जे हटाने के प्रति अपनी वचनबद्धता को दोहराते रहे। सूत्र बता रहे हैं कि 21 जनवरी के बाद ट्रस्ट द्वारा दोबारा कार्रवाई की जा सकती है। हालांकि ट्रस्ट अधिकारी इस बारे कुछ भी कहने को तैयार नहीं हैं।

 

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