सीटें खाली रह जाने से चिंतित है आईआईटी

नई दिल्ली :आईआईटी परास्नातक कोर्सों में सीटों के खाली रह जाने से चिंतित है क्योंकि देशभर की सभी आईआईटी परास्नातक कोर्स में सीटें खाली रह जा रही हैं। इस संदर्भ में आईआईटी ने इसकी शिकायत कई बार मानव संसाधन विकास मंत्रालय से भी की है। आईआईटी जल्द ही इसे खत्म करने के लिए सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों (पीएसयू) से एमटेक दाखिले से पहले छात्रों की नियुक्तियां करने की मांग करेगी। आईआईटी की शिकायत है कि एमटेक में प्रवेश मिलने के तीन माह बाद ही सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियां छात्रों को नियुक्तियां दे देती हैं। इससे हर साल एमटेक में सैकड़ों सीटें खाली रह जाती हैं। जानकारी के अनुसार मानव संसाधन विकास मंत्रालय और आईआईटी जल्द ही सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों के प्रतिनिधियों से मुलाकात करेंगे। दो आईआईटी परिषद के सदस्यों ने बताया कि इस दौरान एचआरडी और आईआईटी के लोग पीएसयू के प्रतिनिधियों को एमटेक दाखिला शुरू होने से पहले उन्हें नियुक्तियां करने के लिए मनाएंगे। आईआईटी परिषद की अध्यक्षता मानव संसाधन विकास मंत्री करते हैं और इसमें सभी आईआईटी निदेशक और अध्यक्ष शामिल होते हैं। परिषद में ही आईआईटी से संबंधित सभी फैसले लिए जाते हैं। 

30 फीसदी सीटें रह जाती हैं खाली
आईआईटी महत्वाकांक्षी ब्रांड हैं जहां सभी होनहार छात्र अध्ययन करना चाहते हैं। लेकिन पीएसयू द्वारा देरी से नियुक्ति करने के चलते कई विभागों में एमटेक की लगभग 30 फीसदी सीटें खाली रह जाती हैं। आईआईटी परिषद के सदस्य ने बताया कि एक बार दाखिले का समय समाप्त होने के बाद आप इन सीटों को नहीं भर पाते हैं। इसलिए सीटों के खाली रहने की समस्या आ रही है। मालूम हो कि गेट पास करने वाले अभ्यर्थियों में से पीएसयू हर साल नियुक्तियां करता है। यह परीक्षा आईआईटी के परास्नातक पाठ्यक्रम में दाखिले के लिए हर साल अक्तूबर-नवम्बर में होती है। पास करने वाले उम्मीदवार एमटेक में प्रवेश लेते हैं। इसके तीन माह के भीतर ही पीएसयू द्वारा चयनित उम्मीदवार नौकरी के लिए एमटेक बीच में छोड़ देते हैं। इससे हर साल आईआईटी, एनआईटी और अन्य केंद्रीय संस्थानों में सीटें खाली रह जाती हैं।

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