Independence Day: IAS यूनुस की अनूठी पहल, हजारों शहीदों के परिजनों को भेजे सैल्यूट पत्र (PICS)

ऊना (सुरेन्द्र शर्मा): युवा आई.ए.एस. अधिकारी एवं डी.सी. कुल्लू यूनुस का मार्मिक पत्र अब उन शहीद सैनिकों के परिजनों को मिलेगा, जिन्होंने देश की रक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति दी है। यूनुस ने ऐसे 22 हजार शहीद सैनिकों के परिजनों को पत्र लिखे हैं। इनमें हिमाचल के 1500 शहीद सैनिक भी शामिल हैं। अपनी तरफ से सैल्यूट करते हुए यूनुस ने शहीदों के बलिदान की न केवल सराहना की है बल्कि उनकी वजह से देश सुरक्षित होने की बात का भी अपने पत्र में उल्लेख किया है। पंजाब के तरनतारन के शहीद परमजीत सिंह की बेटी को एडॉप्ट कर चुके यूनुस का सैनिकों और उनके परिवारों के प्रति शुरू से ही लगाव रहा है। जब भी कोई सैनिक शहीद होता है तो वह बुरी तरह से द्रवित हो जाते हैं। 
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शहीदों के परिजनों के सपनों को पूरा करने के लिए वह अपने स्तर पर कुछ योजनाएं भी शुरू करना चाहते हैं। स्वतंत्रता दिवस से पहले अपने स्तर पर यूनुस ने यह सैल्यूट पत्र पोस्ट करने शुरू किए थे। अब तक वह हजारों पत्र शहीद सैनिकों के परिजनों को भेज चुके हैं। यूनूस का कहना है कि जब कोई जवान सीमा पर प्रहरी की भूमिका में होता है तो परिजन उसकी सकुशलता के पत्र के इंतजार में होते हैं। शहादत के बाद ऐसे किसी पत्र की कोई उम्मीद उनके परिजनों को नहीं होती है। ऐसे में यह पत्र स्मरण करवाएगा कि किस प्रकार देश की आजादी के लिए सैनिक ने अपने प्राणों की आहुति देकर देश की अखंडता को कायम रखा है। 
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सियाचिन के बाद अब यूनुस राजस्थान के जैसलमेर सहित भारत और पाकिस्तान की सीमा पर पहुंचे और वहां विकट परिस्थितियों में कर्तव्य निर्वहन कर रहे सैनिकों से मुलाकात की। करीब 3 दिन तक यूनुस ने सैनिकों के साथ व्यतीत किए। उन्होंने जांबाज सैनिकों की उन कठिन परिस्थितियों को भी जाना जिनमें वे दिन-रात ड्यूटी दे रहे हैं। पहले माइनस तापमान में काम करने वाले सैनिकों के बीच सियाचिन और अब रेगिस्तान पहुंचने वाले यूनुस पहले आई.ए.एस. अधिकारी हैं जिन्होंने सैनिकों के बीच रहकर उनके द्वारा दी जाने वाली सेवाओं को नजदीक से देखा है। यूनुस पूरे देश के उन शहीदों का डाटा एकत्रित कर रहे हैं जिन्होंने देश की रक्षा के लिए अपना बलिदान दिया है। इसमें सेना के अतिरिक्त अद्र्धसैनिक बलों के जवान तथा वे नागरिक भी शामिल होंगे जिन्होंने देश की आन-बान के लिए अपने प्राण न्यौछावर किए हैं। 
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यूनुस कहते हैं कि जब कोई सैनिक देश की रक्षा करते हुए शहीद होता है तो उसका दर्द एक परिवार का नहीं पूरे देश का दर्द होना चाहिए। हम खुली हवा में इसलिए सांस ले रहे हैं क्योंकि सैनिक दिन-रात सीमा पर सजग प्रहरी के रूप में सेवाएं दे रहे हैं। शहीदों और उनके परिजनों के प्रति मन में अगाध आस्था रखने वाले यूनुस तथा उनकी धर्मपत्नी आई.पी.एस. अधिकारी अंजुम आरा ने जम्मू-कश्मीर के पूंछ सैक्टर में शहीद हुए नायब सूबेदार परमजीत सिंह की बेटी खुशदीप को 2 वर्ष पहले एडॉप्ट किया था। उसके पालन-पोषण की पूरी जिम्मेदारी यूनुस ही निभा रहे हैं। प्रत्येक पर्व पर वह शहीद के परिजनों के पास तरनतारन पहुंचते हैं और उन्हें अपने परिवार का हिस्सा मानते हैं। सैनिकों के प्रति मन में अथाह सम्मान रखने वाले आई.ए.एस. अधिकारी यूनुस खान ने वर्ष 2017 में सियाचिन पहुंचने के लिए सड़क मार्ग से लगभग 1600 किलोमीटर की दूरी भी तय की थी। 
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कई कठिनाइयों को पार करते हुए युवा आई.ए.एस. अधिकारी सियाचिन पहुंचे थे और यहां जाकर उन्होंने सैनिकों के साथ अनुभवों को सांझा किया था। किस प्रकार माइनस तापमान के बीच सैनिक देश की रक्षा में जुटे होते हैं, इसको उन्होंने अनुभव किया था। आई.ए.एस. अधिकारी एवं डी.सी. कुल्लू यूनुस ने माना कि वह 22 हजार शहीद सैनिकों के परिजनों को पत्र लिखे हैं। इसमें ऐसे जांबाज सैनिकों के बलिदान को सैल्यूट करते हुए उनके द्वारा दिए गए योगदान बारे उल्लेख किया गया है। यूनुस कहते हैं कि शहीदों के परिवारों के भी सपने होते हैं और देश के लोगों को ऐसे शहीदों के परिजनों के सपनों को पूरा करने के लिए एक साथ आगे आना चाहिए। उन्होंने माना कि वह 3 दिन तक जैसलमेर सहित भारत-पाक सीमा पर तैनात सैनिकों से मिलने गए थे। किस प्रकार से सैनिक वहां देश की रक्षा में जुटे हुए हैं, इसको लेकर कई अनुभव हासिल हुए हैं। आने वाले समय में शहीदों के परिवारों के कल्याण के लिए कई और भी कदम उठाए जाएंगे।
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