आईएएस बनना टॉपर्स की पहली पसंद, विदेश सेवा की चमक घटी

नई दिल्लीःसिविल सर्विसेज परीक्षा में सफल होने वाले अभ्यर्थियों के लिए आईएएस बनना पहली पसंद और मजबूत रूप से स्थापित हो गया है। इस साल सिविल सर्विसेज परीक्षा में टॉप 100 में आने वाले प्रतिभागियों ने आईएएस काडर ही चुना है। डीओपीटी की जारी काडर लिस्ट के अनुसार टॉप 100 में 90 ने आईएएस, पांच ने आईएफएस, तीन ने आईपीएस और दो ने आईआरएस काडर चुना। 10 सालों में यह पहली बार है, जब टॉप 100 में शामिल प्रतिभागियों ने इतने बड़े पैमाने पर आईएएस को चुना। हालांकि, काडर आवंटन के क्रम में पहले आईएफएस, फिर आईएएस, आईपीएस और अंत में केंद्रीय सेवाओं की ग्रेड ए सर्विसेज को रखा जाता है। 

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कभी फॉरेन सर्विस थी पहली पसंद
सिविल सर्विसेज परीक्षा के शुरुआती दिनों में आईएफएस टॉपर्स की पहली पसंद रहती थी। लेकिन बाद में आईएएस ने इसकी जगह ले ली। पिछले सात सालों में इसमें फिर बदलाव का ट्रेंड दिखा था जब टॉप 100 में आने वाले 70 प्रतिभागी औसतन आईएएस काडर चुनते थे। 2014 में 89 सफल अभ्यर्थियों ने आईएएस चुना था। वहीं, 2012 में टॉप 20 में 11 अभ्यर्थियों ने गैर आईएएस काडर चुना था। इन सालों में आईपीएस चुनने का भी ट्रेंड बढ़ा था। लेकिन अचानक ब्यूरोक्रेट बनने का ट्रेंड लौटता दिख रहा है। टॉप 20 में मात्र एक स्टूडेंट ने आईपीएस को चुना, बाकी 19 ने आईएएस। आईएएस, आईपीएस और आईएफएस के अलावा चौथे नंबर पर रेवेन्यू सर्विस सबसे बड़ी पसंद बनकर उभरी है। इसी सेवा से इनकम टैक्स विभाग में पोस्टिंग होती है। 

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अगले साल से नया काडर सिस्टम 
अगले साल से सिविल सर्विसेज परीक्षा में सफल होने वाले अभ्यर्थियों को मनमाफिक राज्य नहीं, बल्कि जोन मिलेगा। सरकार ने नए प्रस्तावित सिस्टम को मंजूरी दे दी है और डीओपीटी को इसी अनुरूप तैयारी करने को कहा है। सूत्रों के अनुसार इस दिशा में औपचारिक अधिसूचना इसी महीने जारी हो सकती है। 

 

ग्रेड ए अधिकारियों के काडर बंटवारे में बड़ा बदलाव करने जा रही है। इसके तहत अब आईएएस, आईपीएस या आईएफएस कॉडर में आने के बाद मनमाफिक राज्य काडर चुनने की बजाय जोन का चुनाव करेगी। सरकार उन अधिकारियों को उस जोन के अंतर्गत किसी भी राज्य में भेज सकती है। अभी इन अधिकारियों के लिए 26 काडर हैं। लेकिन नई व्यवस्था के तहत पांच जोन बनाए जाएंगे। अभ्यर्थी को सिविल सर्विसेज परीक्षा के दौरान अपने पसंदीद स्टेट के अलावा जोन भी बताने होंगे। सरकार का तर्क है कि ऑल इंडिया सर्विसेज के अधिकारियों को एक ही राज्य में रहने से अपेक्षित लाभ नहीं होता। 

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